पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधते हुए कहा कि केंद्र की उदासीनता का खामियाजा आज देश के किसान भुगत रहे हैं।
कोलकाता। तीनों केंद्रीय कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग को लेकर किसान संगठन बीते 6 महीने से अधिक समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान कई राजनीतिक दलों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर किसान संगठनों को समर्थन मिलता रहा है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी किसान आंदोलन का समर्थन करती रही हैं और अब एक बार फिर से किसान आंदोलन के समर्थन में उतर आई हैं।
ममता बनर्जी ने ट्वीट करते हुए किसान आंदोलन का समर्थन किया और केंद्र सरकार पर जमकर भड़ास निकाली। उन्होंने लिखा कि केंद्र सरकार की उदासीनता का खामियाजा आज देश के किसान भुगत रहे हैं।
किसान भाई केंद्र की उदासीनता का भुगत रहे हैं खामियाजा: ममता
ममता ने ट्वीट करते हुए लिखा, आज से दस साल पहले सिंगुर भूमि पुनर्वास और विकास विधेयक 2011 को बंगाल विधानसभा में एक लंबे और कठिन संघर्ष के बाद पारित किया गया था। हमने एकजुट होकर अपने किसानों के अधिकारों के लिए लड़ाई लड़ी और उनकी शिकायतों का समाधान किया, जिससे उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव आया।
उन्होंने आगे लिखा, आज मुझे दुख हो रहा है कि देशभर में हमारे किसान भाई केंद्र की उदासीनता का खामियाजा भुगत रहे हैं। साथ में, हम अपने समाज की रीढ़ की हड्डी की भलाई सुनिश्चित करने के लिए अपनी लड़ाई जारी रखेंगे। उनके अधिकारों की रक्षा करना सर्वोच्च प्राथमिकता है।
शुरू से किसान आंदोलन का समर्थन कर रही हैं ममता
बता दें कि पिछले सप्ताह भारतीय किसान यूनियन के नेता और इस पूरे आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे राकेश टिकैत ने बंगाल सचिवालय में ममता बनर्जी से मुलाकात की थी। इस दौरान दोनों के बीच केंद्र सरकार के खिलाफ इन कृषि कानूनों की वापसी की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने की रणनीति पर चर्चा हुई थी।
ममता बनर्जी शुरू से ही किसान आंदोलन का समर्थन करती रहीं हैं। इससे पहले इसी साल मार्च-अप्रैल में बंगाल विधानसभा चुनाव के दौरान किसान नेता राकेश टिकैत ने तृणमूल कांग्रेस को जिताने की बात तक कही थी। उन्होंने बंगाल में जानकर भाजपा के खिलाफ प्रचार भी किया था। वहीं इससे पहले राजधानी दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों से तृणमूल के कई सांसद मिलने पहुंचे थे और मौके पर से सीएम ममता से फोन पर बात भी कराई थी।