रुझानों में राज्य में भाजपा की जीत के संकेतों से यहां सन्नाटा पसरा हुआ है।
नई दिल्ली| गुजरात और हिमाचल प्रदेश विधानसभा चुनावों में सोमवार को कांग्रेस पार्टी की स्पष्ट दिखती हार के बाद दिल्ली स्थित कांग्रेस मुख्यालय में सन्नाटा पसरा हुआ है। हालांकि, मतगणना के शुरुआती रुझानों में गुजरात में भाजपा पर कांग्रेस की बढ़त के रुख से पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में उत्साह था। कांग्रेस के दिल्ली मुख्यालय में भी जश्न का माहौल था। गुजरात में कांग्रेस की बढ़त के रुझानों से पार्टी कार्यकर्ता कार्यालय में जुटने लगे लेकिन बाद के रुझानों में राज्य में भाजपा की जीत के संकेतों से यहां सन्नाटा पसरा हुआ है।
दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार
यह स्पष्ट होने के बाद कि गुजरात और हिमाचल दोनों राज्यों में भाजपा की सरकार बनती नजर आ रही है। पार्टी कार्यकर्ता और नेता कांग्रेस मुख्यालय से निकलना शुरू हो गए। दोपहर तक कांग्रेस कार्यालय में कोई प्रमुख नेता मौजूद नहीं था और जो मौजूद थे उन्होंने मीडिया से बात करने से इनकार कर दिया। महाराष्ट्र से कांग्रेस सांसद राजीव सातव ने हालांकि मीडिया से बात करते हुए कहा कि उनकी पार्टी ने गुजरात में अच्छी लड़ाई लड़ी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विकास एजेंडा के बजाए भावनात्मक रूप से मतदाताओं को लुभाया। सातव ने संवाददाताओं को बताया, "मोदी को चुनाव अभियान के आखिरी दिन तक प्रचार करना पड़ा। इससे कांग्रेस के असल प्रदर्शन का पता चलता है।"
NOTA ने किया उलटफेर
चुनाव आयोग के आंकड़ों पर गौर करें तो गुजरात में निर्दलीय उम्मीदवारों को 4.1 प्रतिशत (988415) वोट पड़ा है। वहीं दूसरी ओर से NOTA को 1.8 प्रतिशत (445037) वोट मिले हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि नोटा को पड़े वोट बहुजन समाज पार्टी और एनसीपी को पड़े वोट से अधिक है। राजनीति के जानकारों की मानें तो यदि निर्दलीय और नोटा पर पड़ने वाले वोट किसी तरह कांग्रेस की ओर खिसक जाते तो चुनावी नतीजों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता था। यदि दोनों पार्टियों को ही पड़े वोटों की बात करें तो अब तक बीजेपी को 49.2 प्रतिशत और कांग्रेस को 41.5 प्रतिशत वोट मिले हैं।