राजनीति

ILFS मामलाः कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के निशाने पर पीएम मोदी, कहा- ये ‘लाइट, कैमरा, स्कैम’

राहुल गांधी ने एक ट्वीट में आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ILFS ग्रुप को राहत प्रदान (बेल आउट) करने जा रहे हैं जिस पर करीब 91 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है।
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ILFS मामलाः कांग्रेस अध्यक्ष राहुल के निशाने पर पीएम मोदी, कहा- ये 'लाइट, कैमरा, स्कैम'

नई दिल्ली। कांग्रेस ने रविवार को केंद्र सरकार पर अपना हमला तेज कर दिया। पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि कर्ज तले दबी हुई कंपनी इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग एंड फाइनेंशियल सर्विसेस (ILFS) को संकट से निकालने के लिए सार्वजनिक धन का उपयोग किया जा रहा है। राहुल गांधी ने एक ट्वीट में आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ILFS ग्रुप को राहत प्रदान (बेल आउट) करने जा रहे हैं जिस पर करीब 91 हजार करोड़ रुपए का कर्ज है।

राहुल ने बताया- लाइट, कैमरा, स्कैम

राहुल के हिंदी में किए गए ट्वीट का शीर्षक 'लाइट, कैमरा, स्कैम' है जिसमें आरोप लगाया गया है कि 2007 में मोदी जब गुजरात के मुख्यमंत्री थे तो ILFS को 70 हजार करोड़ रुपए का 'गिफ्ट सिटी' प्रोजेक्ट दिया गया था। इस योजना के तहत आज तक कोई काम नहीं हुआ। राहुल गांधी ने कहा कि 2018 में मोदी उसी कंपनी को भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) और स्टेट बैंक (एसबीआई) के माध्यम से राहत प्रदान करने जा रहे हैं। हाल ही में कांग्रेस ने इस मसले को उठाया और देश में लेहमन ब्रदर्स जैसे आर्थिक संकट की चेतावनी दी। ILFS के संकट से नॉन-बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी के संपूर्ण क्षेत्र में निवेशकों का भरोसा कम हुआ है। कांग्रेस पार्टी ने पिछले चार साल में कंपनी की 42 हजार करोड़ रुपए की अदायगी का फोरेंसिक ऑडिट करवाने की मांग की।

चार सालों में दिए 42 हजार करोड़ः कांग्रेस

कांग्रेस प्रवक्ता मनीष तिवारी ने ट्वीट के जरिए रविवार को कहा, 'ILFS की वित्तीय जरूरतों का फोरेंसिक ऑडिट करवाने की जरूरत है क्योंकि प्रबंधन, प्रमुख अंशधारक और एनडीए सरकार 42 हजार करोड़ रुपए की रकम के सवालों के बारे में नहीं बताना चाहते हैं। पिछले चार सालों में 42 हजार करोड़ रुपए की अदायगी हुई, लेकिन कोई नहीं जानता कि पैसा कहां गायब हुआ।' ऑडिट की मांग तब की जा रही है जब ग्रुप की वित्तीय स्थिरता को लेकर चिंता पैदा हो गई है। कांग्रेस ने कहा है कि एलआईसी और एसबीआई के जरिए सार्वजनिक बचत की रकम का उपयोग विदेशी संस्थानों की हिस्सेदारी वाली निजी कंपनी को राहत प्रदान करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।

Published on:
30 Sept 2018 06:39 pm