अगर राज्य में महागठबंधन की सरकार बनती है तो 16 साल पहले के इतिहास को दोहराया जाएगा।
नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर में महागठबंधन सरकार बनाने की कवायद तेज हो गई है। पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस संयुक्त रूप से सरकार बनाने की तैयारी में है। इस कड़ी में पीडीपी के अल्ताफ बुखारी का नाम मुख्यमंत्री की रेस में सबसे आगे चल रहा है। वहीं यूपीए चेयरपर्सन सोनिया गांधी से मुलाकात करने के लिए सूबे की पूर्व मुख्यमत्री और पीडीपी की नेता महबूबा मुफ्ती दिल्ली रवाना हो गई हैं। अगर राज्य में महागठबंधन की सरकार बनती है तो 16 साल पहले के इतिहास को दोहराया जाएगा। 2002 में पीडीपी-कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाई थी और नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बाहर से समर्थन दिया था। जो पांच साल तक चली थी।
जम्मू कश्मीर में बड़ा सत्ता परिवर्तन
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस पार्टी के बीच चल रही बातचीत पर अगर मुहर लगती है। तो जम्मू-कश्मीर में बड़ा सत्ता परिवर्तन होगा और महबूबा मुफ्ती की जगह अल्ताफ बुखारी राज्य के नए मुख्यमंत्री बनेंगे।
23 नवंबर को दिल्ली में बड़ी बैठक
वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस नेता अंबिका सोनी ने कहा कि 23 नवंबर को दिल्ली में जम्मू कश्मीर के 50 नेताओं को बैठक होने जा रही है। बैठक पंजाब भवन में होगी। वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि अभी इस मुद्दे पर पार्टियों के बीच बातचीत चल रही है। लेकिन किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचे हैं।
महागठबंधन के पास 55 सीट
गौरतलब है कि मौजूदा समय में जम्मू एवं कश्मीर में राज्यपाल शासन है। 19 दिसंबर को राज्यपाल शासन के छह महीने पूरे हो जाएंगे। इस साल जून में भाजपा ने पीडीपी से समर्थन वापस ले लिया था। राज्य के 87 विधानसभा सीट में पीडीपी के पास 28 सीटें हैं। वहीं कांग्रेस के पास 12 और नेशनल कॉन्फ्रेंस के पास 15 सीटें । जबकि भाजपा के पास 25 सीटें हैं। बहुमत के लिए 44 सीटों की जरूरत है। जबकि महागठबंधन के पास 55 सीट है।