राजनीति

कर्नाटक चुनाव: सिद्धारमैया और येदियुरप्पा की लड़ाई में बाकी है रेड्डी बंधुओं का दांव

जनार्दन रेड्डी, करुणाकरन रेड्डी और सोमशेखर रेड्डी का कर्नाटक की राजनीति में दखल अब भी है हालांकि पुराने दिनों की तरह उनका रसूख अब नहीं रहा है।
2 min read
Reddy Brothers

बेंगलुरु। रेड्डी भाईयों का कर्नाटक की राजनीति में उत्कर्ष एक महत्वपूर्ण घटना थी। 2008 में रेड्डी भाइयों के समर्थन और सहयोग से भाजपा को बहुत फायदा हुआ लेकिन इसके बाद कर्नाटक की राजनीति में आये कई परिवर्तनों ने रेड्डी बंधुओं को भाजपा से दूर कर दिया। जनार्दन रेड्डी, करुणाकरन रेड्डी और सोमशेखर रेड्डी का कर्नाटक की राजनीति में दखल अब भी है हालांकि पुराने दिनों की तरह उनका पहले वाला रसूख अब नहीं रहा है।

साल 2010 में कर्नाटक विधानसभा के मॉनसून सेशन के दौरान तत्कालीन विपक्ष नेता सिद्धारमैया ने खनन और अन्य आपराधिक गतिविधियों को लेकर रेड्डी बंधुओं पर हमला बोला था। उस समय रेड्डी बंधुओं ने सिद्धारमैया को खुली चुनौती भी दी थी कि वहउनके गढ़ बेल्लारी का दौरा करके दिखाए। बता दें कि सिद्धारमैया का यह आरोप 2008 में लोकायुक्त न्यायमूर्ति एन संतोष हेगड़े की एक रिपोर्ट के बाद आया था जिसमें उन्हें खनन घोटाले का दोषी ठहराया था। रेड्डी बंधुओं की इस चुनौती को स्वीकार करते हुए सिद्धारमैया ने कहा था कि वो कांग्रेस पार्टी के लिए बेल्लारी में 350 किलोमीटर की लंबी यात्रा करेंगे। सिद्धारमैया का ऐसा जादू रहा कि बेल्लारी की जनता ने उनका पूरा समर्थन किया। उनकी इस रैली से बेल्लारी में अब तक सुरक्षित रहा रेड्डी बंधुओं का साम्रज्य डगमगाने लगा।

अर्श से फर्श पर आये रेड्डी बंधु

कहते हैं कि शिखर पर पड़ाव नहीं लगते। रेड्डी बंधुओं के साम्रज्य डगमगाने के साल भर के भीतर ही येदियुरप्पा पर 50 हजार करोड़ के खनन घोटाले के आरोप लगने लगे। दबाव यहाँ तक बढ़ा कि उन्हें सीएम पद से इस्तीफा देना पड़ा। उधर रेड्डी बंधुओं पर सीबीआई ने मामला दर्ज कर लिया था और जल्द ही रेड्डी बंधु जेल भेज दिए गए थे। येदियुरप्पा की भी गिरफ्तारी हुई और आने वाले चुनाव में सिद्धारमैया के नेतृत्व में कांग्रेस की जीत हुई।

क्या इस बार भाजपा के साथ आएंगे रेड्डी बंधु

भ्रष्टाचार के आरोप लगने के बाद रेड्डी बंधु कर्नाटक में राजनीतिक रूप से चमकहीन हो गए। भाजपा के नेतृत्व ने उन्हें अपनी नजरो से उतार दिया। अंडर ट्रायल रहते हुए जेल में कुछ समय बिताने के बाद आखिरकार जनार्दन रेड्डी बाहर आए लेकिन तब भाजपा उन्हें पार्टी में रखना नही चाहती थी। साल 2008 में रेड्डी भाईयों ने अपने पैसे और शक्ति के दम पर दक्षिणी राज्य में बीजेपी को जीत का स्वाद चखाया था लेकिन इसके बाद उनकी स्थिति काफी खराब होती गई। बदली राजनीतिक परिस्थितियों में एक बार फिर से रेड्डी बंधुओं के साथ भाजपा की बाद रहीं नजदीकियों की खबरे आ रही हैं पर असल में अब रेड्डी बंधु क्या करेंगे, यह कहना अभी बहुत मुश्किल है।

Published on:
26 Apr 2018 09:50 am