...तो क्या सिद्धारमैया के सीएम की कुर्सी जाने की असली वजह बनी कर्नाटक की 'नोएडा'।
नई दिल्ली। कर्नाटक चुनाव के परिणाम लगभग साफ हो चुके हैं। किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिली। ऐसे में यहां गठबंधन की सरकार बनाने की तैयारी चल रही है। एक ओर जहां भाजपा ने राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा किया है। वहीं, दूसरी ओर जेडीएस ने भी कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा किया है। इतना ही नहीं सिद्धारमैया ने भी सरकार बनाने के लिए राज्यपाल से मुलाकात की। लेकिन, इस चुनाव में सबसे आश्चर्य की बात यह रही कि मुख्यमंत्री सिद्धारमैया खुद चामुंडेश्वरी से चुनाव हार गए और इस हार के साथ उनकी कुर्सी भी चली गई। इनके हार के साथ ही कर्नाटक में एक अंधविश्वास ने फिर जन्म ले लिया है।
बताया जा रहा है कि यूपी के नोएडा की तरह कर्नाटक के 'चामराजनगर' को भी सीएम के लिए अशुभ माना जाता है। क्योंकि, जो भी मुख्यमंत्री ने कार्यकाल के दौरान यहां का दौरा किया उनकी कुर्सी चली गई। ऐसा माना जा रहा है कि सिद्धरमैया भी इस अंधविश्वास के शिकार हो गए, क्योंकि अपने कार्यकाल में उन्होंने 9 बार चामराजनगर का दौरा किया था।
1980 से शुरू हुआ था सिलसिला
कर्नाटक में सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री पद संभालने वाले डी. देवराज उर्स को 1980 में इस शहर का दौरा करने के बाद सत्ता गंवानी पड़ी थी। उनके बाद सीएम बने आर. राव, रामकृष्ण हेगड़े, एस.आर.बोमई और वीरेंद्र पाटिल का भी यही हश्र हुआ। इसके बाद 2007 में एच. डी. कुमास्वामी ने इस शहर का दौरा किया। 17 साल के बाद कोई मुख्यमंत्री इस शहर में आया था। हालांकि उन्हें शुभचिंतकों और परिवार के सदस्यों ने यहां का दौरा करने को मना किया था। इसका नतीजा यह हुआ कि 20 महीने सरकार चलाने के बाद उन्हें अक्तूबर, 2007 में सत्ता गंवानी पड़ी। वहीं, कुमारस्वामी के बाद मुख्यमंत्री बनने वाले बी.एस. येदियुरप्पा और डी.वी. सदानंद गौड़ा अपने कार्यकाल के दौरान चामराजनगर के आसपास भी नहीं गए। हालांकि, जगदीश शेट्टर 2013 में चुनाव से कुछ हफ्ते पहले इस शहर पहुंचे और उन्हें कांग्रेस के हाथों हार झेलनी पड़ी।