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महाराष्ट्र में ‘शिंदे ब्रांड’ का जलवा! एक महीने में दूसरी बड़ी पार्टी का शिवसेना में हो सकता है विलय

महाराष्ट्र विधान परिषद की 17 सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर राज्य में सियासी हलचल बढ़ गई है। इस बीच, खबर है कि हितेंद्र ठाकुर की बहुजन विकास आघाड़ी को शिवसेना में विलय करने का प्रस्ताव मिला है।

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मुंबई

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Dinesh Dubey

May 26, 2026

Shiv Sena Bahujan vikas aaghadi bva merger

शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे (Photo: IANS)

महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) की 17 स्थानीय निकाय निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव की तारीख नजदीक आते ही सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन में सीट बंटवारे को लेकर जोरदार खींचतान देखने को मिल रही है। इसी बीच ठाणे सीट को लेकर एक बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है, जिसने राज्य की सियासत में नई चर्चा छेड़ दी है। दरअसल यहां उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे बड़ा दांव खेलने की तैयारी में है। यह सीट शिवसेना के पास ही थी और रवींद्र फाटक यहां से एमएलसी थे, जिनका कार्यकाल 8 जून 2022 समाप्त हो गया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ठाणे विधान परिषद सीट से बहुजन विकास आघाड़ी (BVA) के नेता व हितेंद्र ठाकुर के बेटे क्षितिज ठाकुर को उम्मीदवार बनाया जा सकता है। माना जा रहा है कि रवींद्र फाटक की जगह शिवसेना अब क्षितिज ठाकुर को मौका दे सकती है।

शिवसेना में हो सकता है बहुजन विकास आघाड़ी का विलय

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की ओर से ठाकुर पिता-पुत्र को शिवसेना में शामिल होने का ऑफर मिला है। साथ ही उनकी बहुजन विकास आघाड़ी को भी शिवसेना में विलय करने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके पीछे शिवसेना की रणनीति ठाणे और पालघर बेल्ट में अपने मतों की ताकत बढ़ाना है। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि हितेंद्र ठाकुर की बहुजन विकास आघाड़ी शिवसेना में विलय करेगी या फिर अलग पहचान बनाए रखेगी।

बच्चू कडू के बाद अब ठाकुर की बारी!

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही बच्चू कडू की प्रहार जनशक्ति पार्टी का शिवसेना में विलय हुआ था। इसके बदले शिवसेना ने बच्चू कडू को विधान परिषद सदस्य बनाया। जब शिवसेना में विभाजन के बाद शिंदे मुख्यमंत्री बने थे तो विदर्भ के फायरब्रांड नेता बच्चू कडू को भी मंत्री बनाया गया था। अब बहुजन विकास आघाड़ी को लेकर भी वैसी ही रणनीति अपनाए जाने की चर्चा है।

कौन हैं हितेंद्र ठाकुर?

हितेंद्र ठाकुर वसई-विरार और नालासोपारा क्षेत्र में लंबे समय से एक मजबूत राजनीतिक चेहरा माने जाते हैं। उन्होंने 2009 में बहुजन विकास आघाड़ी (BVA) की स्थापना की थी और वसई विधानसभा क्षेत्र से कई बार विधायक रह चुके हैं। उनके बेटे क्षितिज ठाकुर फिलहाल नालासोपारा से विधायक हैं। स्थानीय मुद्दों पर केंद्रित राजनीति और क्षेत्रीय पकड़ ही उनकी सबसे बड़ी ताकत मानी जाती है, जिसके कारण बीजेपी समेत अन्य दल उनके क्षेत्र में पैर जमाने में नाकाम रहे हैं।

इसी साल जनवरी में हुए वसई-विरार महानगरपालिका चुनाव में बीवीए ने प्रचंड बहुमत हासिल करते हुए एक बार फिर अपना अभेद्य किला फतह कर लिया था। 115 सीटों में से हितेंद्र ठाकुर की पार्टी 71 सीटों पर जीती थी। जहां 'सीटी' चुनाव चिन्ह वाली बीवीए को स्पष्ट बहुमत मिला, वहीं भाजपा 43 सीटों पर सिमट गई। इसके अलावा शिवसेना (एकनाथ शिंदे) की झोली में एक सीट आई और कांग्रेस, उद्धव ठाकरे की शिवसेना, एनसीपी समेत अन्य सभी दलों का खाता तक नहीं खुला।