
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव 2019 (Lok sabha Election 2019) के लिए चौथे चरण का चुनाव 29 अप्रैल को होगा। संसद की आधी से अधिक सीटों के लिए मतदान हो चुका है। बिहार में भी 14 सीटों पर प्रत्याशियों की किस्मत ईवीएम में कैद हो गई है। लेकिन सबसे बड़ा सवाल ये है कि बिहार में सत्तारूढ़ NDA के घटक दल जनता दल (यू) JDU ने अभी तक अपना घोषणा पत्र जारी नहीं किया है। यानी पार्टी बिना मेनिफेस्टो घोषित किए ही चुनाव लड़ रही है। जब इस बारे में JDU के वरिष्ठ नेता और पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता केसी त्यागी से शुक्रावार शाम मोबाइल पर बात की गई तो उन्होंने कहा कि हमारे पास समय नहीं है, लेकिन एक या दो दिन में घोषणा पत्र जारी करेंगे। गौरतलब है कि चुनाव खत्म होेने तक अगर पार्टी मेनिफेस्टो जारी नहीं करती है तो 2003 में पार्टी गठन के बाद ऐसा पहली बार होगा , जब जेडीयू ने बिना घोषणा पत्र ही चुनाव लड़ा हो ।
9 सीटों पर JDU प्रत्याशियों की किस्मत EVM में कैद
दरअसल बिहार में जिन 14 सीटों पर चुनाव हुए हैं, उसमें 9 सीटों पर जनता दल (यू) के प्रत्याशी हैं। अब सिर्फ सात सीटों पर ही JDU प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला होना है। ऐसे में सियासी गलियारों में इसको लेकर कई तरह की अटकलें चल रही हैं। कोई इसके लिए भाजपा को कटघरे में खड़ा कर रहा है, तो कोई जदयू को ही जिम्मेदार ठहरा रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो भाजपा जदयू के मेनिफेस्टो से कुछ बिंदुओं को हटाने के लिए दबाव बना रही है। लेकिन जदयू इस ऐसा करने को राजी नहीं है।
BJP और JDU में इन मुद्दों पर अलग-अलग राय
भाजपा अपने घोषणा पत्र में कश्मीर से आर्टिकल 370, 35 (A) को हटाने और कॉमन सिविल कोड लागू करने की प्रमुखता से चर्चा की है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने घोषणा पत्र जारी करते हुए कहा था सरकार 2019 में दोबारा सत्ता में आई तो कश्मीर को भारत से जोड़ने के लिए विशेषाधिकार कानून खत्म करेंगे। लेकिन जदयू इन मुद्दों पर अलग राय रखता है। जनता दल (यू) हमेशा से धारा 370 के पक्ष में है। जबकि कॉमन सिविल कोड पर जदयू की राय अलग रही है। राम मंदिर मुद्दे पर भी जदयू ने कभी भाजपा के सुर में सुर नहीं मिलाया है। ऐसे में पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का मानना है कि वैचारिक मतभेदों का असर चुनावी माहौल में बाहर नहीं आना चाहिए, जिससे गठबंधन को नुकसान उठाना पड़े।
एक से दो दिन में जारी होगा घोषणा पत्र- JDU
मेनिफेस्टो को लेकर भाजपा की दबाव वाली खबर पर जदयू प्रवक्ता अजय आलोक का कहना है कि इस मुद्दे पर हमारी कोई चर्चा नहीं हुई है। इसपर बेवजह की बातें की जा रही हैं। 20 साल से हम भाजपा के साथ हैं। हमारे ऊपर कोई दबाव या सोच थोपने जैसी चीज नहीं है। हमारा एजेंडा विकास है, विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ रहे हैं। दो से तीन दिनों में घोषणा पत्र जारी हो जाएगा। हालांकि अजय आलोक इससे पहले कह चुके हैं कि धारा 370, राम जन्मभूमि और तीन तलाक पर जदयू की राय भाजपा से अलग है। सभी पार्टियों को अपना विचार रखने का हक है, हमारा स्टैंड भाजपा को पता और उनका हमें पता है।
दबाव वाली कोई बात नहीं- BJP
वहीं भाजपा नेता बी एन झा का कहना है कि हम एक दूसरे के विचारों को अच्छी तरह जानते हैं। हम काफी सालों से एक साथ हैं, इसमें छुपाने या दबाव डालने वाली कोई बात नहीं है। बिहार की बेहतरी और देशहित के लिए जो अच्छा होगा वह मिलकर करेंगे।
बिहार में सीट बंटवारों का ये है समीकरण
दरअसल बिहार में 40 लोकसभा सीटों पर भाजपा-जेडीयू और लोजपा एक साथ चुनाव लड़ रही हैं। भाजपा-जेडीयू 17-17 सीटों पर और लोक जनशक्ति पार्टी 6 सीटें पर चुनाव मैदान में है। दोनों दलों ने अपना मेनिफेस्टो जारी कर दिया है। लेकिन सत्ताधारी दल ने अपना घोषणा पत्र जारी नहीं किया है। ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या जनता दल यू किसी दबाव में है या फिर बिना दावे और वादे के साथ ही जनता से वोट मांग रहा है।
| बिहार में इन सीटों पर हो चुका है मतदान |
| क्रमांक | सीट | तारीख | पार्टी |
| 1 | औरंगाबाद | 11 अप्रैल | BJP |
| 2 | गया | 11 अप्रैल | JDU |
| 3 | नवादा | 11 अप्रैल | LJP |
| 4 | जमुई | 11 अप्रैल | LJP |
| 5 | किशनगंज | 18 अप्रैल | JDU |
| 6 | कटिहार | 18 अप्रैल | JDU |
| 7 | पूर्णिया | 18 अप्रैल | JDU |
| 8 | भागलपुर | 18 अप्रैल | JDU |
| 9 | बांका | 18 अप्रैल | JDU |
| 10 | खगड़िया | 23 अप्रैल | LJP |
| 11 | झांझरपुर | 23 अप्रैल | JDU |
| 12 | मधेपुरा | 23 अप्रैल | JDU |
| 13 | सुपौल | 23 अप्रैल | JDU |
| 14 | अररिया | 23 अप्रैल | BJP |