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Maharashtra Politics: दो केंद्रीय मंत्री पद के साथ बीजेपी का मास्टरस्ट्रोक! NCP के दोनों गुटों को साथ लाने की कोशिश

Sharad Pawar Sunetra Pawar NDA Talks: बीजेपी आलाकमान का मानना है कि एनसीपी के अलग दल के रूप में एनडीए में बने रहने से महाराष्ट्र में गैर-ब्राह्मण और मराठा वोट बैंक को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
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मुंबई

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Ashib Khan

Jul 17, 2026

Maharashtra Politics

अजित पवार (बाएं) और शरद पवार (Photo-IANS)

Maharashtra Politics: संसद में 20 जुलाई से मानसून सत्र शुरू होगा। इससे पहले अटकलें लगाई जा रही थी मोदी सरकार सदन में मानसून सत्र के दौरान परिसीमन बिल को एक बार फिर से पेश कर सकती है। हालांकि सदन में दो तिहाई बहुमत नहीं होने की वजह से इस बार सत्र में यह बिल पेश नहीं होगा। लेकिन इससे पहले बीजेपी ने अपने सहयोगी दलों के साथ रणनीतिक कवायद तेज कर दी है।

इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से लिखा कि बीजेपी हाईकमान ने राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुट (शरद पवार और सुनेत्रा पवार) को फिर से एकजुट होकर एनडीए में शामिल होने का प्रस्ताव दिया है।

दो केंद्रीय मंत्री पद का प्रस्ताव

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि बीजेपी आलाकमान ने संतुलन बनाए रखने के लिए केंद्र में दो कैबिनेट मंत्री पद देने का भी प्रस्ताव दिया है। पार्टी चाहती है कि एनसीपी अपनी अलग पहचान बनाए रखे और बीजेपी में विलय न करे।

दरअसल, बीजेपी आलाकमान का मानना है कि एनसीपी के अलग दल के रूप में एनडीए में बने रहने से महाराष्ट्र में गैर-ब्राह्मण और मराठा वोट बैंक को मजबूत करने में मदद मिलेगी। साथ ही, बीजेपी अपने सहयोगी दलों को कमजोर करने के पक्ष में नहीं है।

सत्ता साझेदारी पर फंसा मामला

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि शुरुआती स्तर बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक अंतिम फैसला नहीं हो पाया है। सबसे बड़ी चुनौती एनसीपी के भीतर नेतृत्व और सत्ता साझेदारी को लेकर मानी जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुनेत्रा पवार के बड़े बेटे और राज्य सभा सांसद पार्थ पवार चाहते हैं कि उनकी मां को महाराष्ट्र सरकार में वित्त मंत्रालय मिले। दरअसल, यह विभाग पहले अजित पवार के पास था, लेकिन जनवरी में उनके निधन के बाद यह देवेंद्र फडणवीस को मिल गया। 

इसके अलावा वे चाहते हैं कि जब दोनों एनसीपी एकसाथ हो तब पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष भी सुनेत्रा पवार को बनाया जाए। वहीं, एनसीपी के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल सत्ता और संगठन में अधिक समावेशी भागीदारी के पक्षधर बताए जा रहे हैं। 

दो-तिहाई बहुमत के लिए जुटा रहे समर्थन

बता दें कि लोकसभा चुनाव 2029 से पहले परिसीमन बिल को पास कराना बीजेपी का मुख्य एजेंडा है। मोदी सरकार इस बिल को सदन में एक बार पेश भी कर चुकी हैं, लेकिन संख्या बल नहीं होने के कारण यह पास नहीं हो सका। 

इसके बाद से विपक्ष के चार दलों के 37 सांसद सत्तापक्ष का समर्थन कर चुके हैं, जिसे 1985 में दल-बदल विरोधी कानून लागू होने के बाद विपक्ष से सत्ता पक्ष की ओर सबसे बड़ा राजनीतिक बदलाव माना जा रहा है।

संसद में क्या है संख्या बल?

लोकसभा में कुल सदस्यों की संख्या 543 है। इसमें से तीन सीटें खाली हैं। यानी फिलहाल सदन में 540 सदस्य हैं। सदन में दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सीटों की आवश्यकता होगी। 

दल / गुटसांसदों की संख्या
एनडीए (मूल)292
टीएमसी (TMC)20
शिवसेना (यूबीटी से अलग गुट) 6
कुल संख्या318

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