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लेह-लद्दाख में बदलेगा किसानों की किस्मत, खुल गया कमाई का नया रास्ता

Choglamsar Lily Farming: कृषि वैज्ञानिक लिली की खेती को नया आयाम देने में जुटे हैं। लद्दाख के लेह में पहली बार बड़े स्तर पर लिली की खेती शुरू हुई है। सितंबर में हजारों फूल खिलेंगे, जिससे किसानों की आय बढ़ेगी।
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लेह

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Saurabh Mall

Jul 17, 2026

Choglamsar Lily Farming

लद्दाख में लिली की खेती से बदलेगी किसानों की किस्मत (इमेज सोर्स: डीडी नेशनल एक्स स्क्रीनशॉट)

Leh-Ladakh Lily Farming Update: लेह की कड़ाके की ठंड अब किसानों के लिए परेशानी नहीं, बल्कि कमाई का बड़ा जरिया बनने जा रही है। जिस मौसम को अब तक खेती के लिए चुनौती माना जाता था, वही अब लिली के खूबसूरत फूलों की खेती के लिए सबसे बड़ी ताकत साबित हो रहा है। लेह में पहली बार बड़े स्तर पर लिली की व्यावसायिक खेती शुरू हुई है। सितंबर में यहां हजारों फूल खिलेंगे। इससे किसानों की आय बढ़ेगी और लद्दाख देश के सबसे ऊंचे पुष्प क्षेत्र के रूप में नई पहचान बनाएगा।

सर्द मौसम बना लिली की खेती का सबसे बड़ा साथी

लेह के चोगलमसर इलाके में लिली की खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है। कृषि वैज्ञानिक इस परियोजना पर लगातार काम कर रहे हैं। यह लद्दाख की पहली बड़े स्तर की पुष्पकृषि पहल है। अब तक यहां 50 हजार से ज्यादा लिली के पौधे लगाए जा चुके हैं। उम्मीद है कि सितंबर के पहले सप्ताह तक पूरा क्षेत्र रंग-बिरंगे फूलों से महक उठेगा।

चोगलमसर का यह पुष्प क्षेत्र सिंधु नदी के किनारे करीब 93 हजार वर्ग मीटर में विकसित किया जा रहा है। इसकी ऊंचाई लगभग 3,265 मीटर है। इसके साथ ही यह भारत का सबसे ऊंचा पुष्प उद्यान बनने की ओर बढ़ रहा है।

किसानों को मिलेगा बेहतर मुनाफा

इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य किसानों की आमदनी बढ़ाना है। यहां उगाई जाने वाली प्रीमियम लिली की देश और विदेश दोनों बाजारों में अच्छी मांग है। घरेलू बाजार में इसकी एक डंडी की कीमत 150 से 200 रुपये तक मिल सकती है। होटल, इवेंट, सजावट और फूलों के कारोबार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है।

पहले साल कृषि विभाग इस परियोजना की देखरेख करेगा। फूल खिलने के बाद इसका संचालन स्वयं सहायता समूहों और सहकारी समितियों को सौंप दिया जाएगा। विभाग राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक फूलों की बिक्री में भी सहयोग करेगा, ताकि किसानों को बेहतर दाम मिल सकें।

तीन साल बाद और बढ़ेगी पैदावार

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार लद्दाख की ठंडी जलवायु लिली की खेती के लिए बेहद अनुकूल है। शून्य से नीचे तापमान में भी इसके पौधे अच्छी तरह विकसित होते हैं। लिली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि एक बार पौधे तैयार होने के बाद अगले तीन वर्षों तक उनकी पैदावार बढ़ती रहती है। इससे किसानों की लागत कम होती है और मुनाफा लगातार बढ़ता है।

प्रोजेक्ट के तहत स्थानीय किसानों को आधुनिक पुष्पकृषि की ट्रेनिंग भी दी जा रही है। उन्हें वैज्ञानिक तरीके से खेती, कटाई और भी जरूरी जानकारी दी जाएगी।

इस पहल से स्वयं सहायता समूहों, सहकारी समितियों और युवा उद्यमियों के लिए रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे। आने वाले वर्षों में लेह-लद्दाख सिर्फ अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि लिली की खुशबू और हाई कास्ट वाली फूलों की खेती के लिए भी पूरे देश में नई पहचान बना सकता है।

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