2 जुलाई 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Patrika Explainer: पंजाब में भगवंत मान को हराने के लिए कांग्रेस ने तैयार किया प्लान, एक ही बार में साध लिए सभी समीकरण

Punjab Assembly Elections 2027: पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस ने संगठन में बड़ा संतुलन बनाते हुए अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखा है। वहीं चरणजीत सिंह चन्नी, सुखजिंदर सिंह रंधावा और अन्य नेताओं को अहम जिम्मेदारियां देकर पार्टी ने गुटबाजी खत्म करने और सभी जातीय व सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति अपनाई है।
3 min read
Google source verification
Regional parties decline

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (बाएं) और राहुल गांधी (Photo-IANS)

Punjab Congress Election Strategy 2027: पंजाब में अगले साल विधानसभा चुनाव होने है। इसको लेकर कांग्रेस ने अपनी रणनीति तैयार कर ली है। प्रदेश में कांग्रेस में गुटबाजी थी, लेकिन अब आलाकमान ने इस गुटबाजी को दूर कर दिया है। बताया जाता है कि प्रदेश में बड़े नेताओं के बीच गुटबाजी इस कदर थी कि वे पास में भी नहीं बैठते थे। लेकिन विधानसभा चुनाव को लेकर राहुल गांधी कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे। इसलिए उन्होंने पार्टी के पांच बड़े नेताओं को दिल्ली बुलाया और एक साथ मुलाकात भी की। वहीं इस मामले को हैंडल करने के लिए पार्टी ने प्रियंका गांधी को जिम्मा दिया। जो कि अब सुलझता हुआ नजर आ रहा है।

बता दें कि पंजाब में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष के बदलाव की अटकलें लगाई जा रही थी। माना जा रहा था कि अमरिंदर सिंह राजा के नेतृत्व में कांग्रेस विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेगी। लेकिन अब कांग्रेस ने चुनाव से पहले बुधवार को एक लिस्ट जारी की है। जिसमें पार्टी ने अमरिंदर सिंह की अध्यक्षता में चुनाव लड़ने का फैसला किया है। 

दरअसल, पूर्व सीएम और सांसद चरणजीत सिंह चन्नी ने प्रदेश अध्यक्ष बनने के लिए पूरी ताकत लगाई थी। वहीं सुखजिंदर सिंह रंधावा ने भी अध्यक्ष बनने का दावा ठोका था। लेकिन पार्टी ने अमरिंदर को ही प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी पर बने रहने के लिए कहा है। 

कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष बने चन्नी

पार्टी ने भले ही चन्नी को प्रदेश अध्यक्ष नहीं बनाया हो, लेकिन उन्हें कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाया है। माना जाता है कि कैंपेन कमेटी के अध्यक्ष भी सीएम की रेस में सबसे अहम माना जाता है। हालांकि कांग्रेस की एक रणनीति है कि वह विधानसभा चुनाव से पहले अपना सीएम फेस घोषित नहीं करती है। ऐसा हाल ही में केरल में देखने को मिला है। चुनाव परिणाम के बाद वीडी सतीशन को सीएम बनाया गया। 

किसे क्या दी जिम्मेदारी

पंजाब कांग्रेस का कोर कमेटी का चेयरपर्सन सुखजिंदर सिंह रंधावा को बनाया गया है। विजय इंद्र सिंघला को इलेक्शन मैनेजमेंट और कोऑर्डिनेशन कमेटी का चेयरपर्सन बनाया है। अमर सिंह मेनिफेस्टो कमेटी के अध्यक्ष होंगे। 

कांग्रेस ने साधे सभी समीकरण

पंजाब की राजनीति जट सिख के इर्द-गिर्द ही घूमती है। इस बार बीजेपी ने भी प्रदेश अध्यक्ष जट सिख समुदाय से आने वाले केवल सिंह ढिल्लों बनाया है। इस समुदाय को अपनी ओर करने के लिए कांग्रेस के पास अमरिंदर सिंह राजा और नेता प्रतिपक्ष प्रताप सिंह बाजवा है। वहीं जट सिख से आने वाले सुखजिंदर सिंह को कोर कमेटी का चेयरमैन बनाया है। प्रदेश में जट सिख की आबादी करीब 19 प्रतिशत मानी जाती है। ऐसे में इस समुदाय को अपनी ओर करने के लिए पार्टी के पास काफी जट सिख नेता है। 

हिंदू चेहरे को भी दी कमान

प्रदेश में हिंदुओं की आबादी 38 प्रतिशत के करीब है। कांग्रेस ने हिंदुओं वोटरों को साधने के लिए हिंदू नेताओं को भी अहम जिम्मेदारी दी गई है। हालांकि पहले कयास लगाए जा रहे थे कि विजय इंद्र सिंघला को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। लेकिन अब पार्टी ने उन्हें इलेक्शन मैनेजमेंट और कोऑर्डिनेशन कमेटी का चेयरपर्सन बनाया है। विजय के जरिए पार्टी हिंदू वोटरों को साधने का प्रयास करेगी। 

दलित वोट बैंक पर भी खेला दांव

कांग्रेस ने दलित वोट बैंक पर भी बड़ा दांव खेला है। दलित नेता चरणजीत सिंह चन्नी को कैंपेन कमेटी का अध्यक्ष बनाया है। इससे कांग्रेस पंजाब के साथ-साथ यूपी के दलित वोट बैंक में भी सेंध लगाना चाहती है। दोनों ही राज्यों में अगले साल विधानसभा चुनाव होने है। पंजाब में करीब 31 दलित वोट बैंक है। 

2022 के विधानसभा चुनाव से पहले भी कांग्रेस ने दलित कार्ड खेला था। कैप्टन अमरिंदर की जगह चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाया था। हालांकि पार्टी का यह दांव उल्टा पड़ गया और कांग्रेस को विधानसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा। 

आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर पार्टी ने सभी जाति के नेताओं को जिम्मेदारी देकर यह संदेश दिया है कि पार्टी एक जाति के भरोसे नहीं है। प्रदेश में फिलहाल आम आदमी पार्टी की सरकार है और कांग्रेस ने भगवंत मान को हराने के लिए सभी जातियों के नेताओं को जिम्मेदारी देकर अपनी चाल चल दी है।