17 जुलाई 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

जन्म-मृत्यु पंजीकरण में देरी पर बढ़ेगी सख्ती, सरकार मानसून सत्र में ला रही है पांच विधेयक

मानसून सत्र में केंद्र सरकार पांच नए विधेयक पेश करने जा रही है। इनमें सुप्रीम कोर्ट में जज बढ़ाने, आयकर संशोधन, जन्म-मृत्यु पंजीकरण जैसे नियमों से जुड़े शामिल है। सरकार इन सभी विधेयकों को इसी सत्र में पेश करने के साथ उन पर चर्चा और पारित कराने की तैयारी में है
less than 1 minute read
Google source verification
Parliament House

नई दिल्ली। संसद के आगामी मानसून सत्र में केंद्र सरकार पांच नए विधेयक पेश करने जा रही है। इनमें सुप्रीम कोर्ट में जज बढ़ाने, आयकर संशोधन, जन्म-मृत्यु पंजीकरण जैसे नियमों से जुड़े शामिल है। लोकसभा सचिवालय की ओर से गुरुवार रात को संसद के मानसून सत्र को लेकर संभावित सरकारी कार्यसूची जारी की गई। इसके अनुसार सरकार इन सभी विधेयकों को इसी सत्र में पेश करने के साथ उन पर चर्चा और पारित कराने की तैयारी में है। सरकार सबसे पहले आयकर (संशोधन) विधेयक, 2026 पेश करेगी, जो पहले जारी अध्यादेश का स्थान लेगा।

सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य भारत के सॉवरेन डेट मार्केट को मजबूत करना, विदेशी निवेश आकर्षित करना और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच बाजार में तरलता बढ़ाना है। दूसरा प्रमुख विधेयक सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 होगा। यह भी पहले आए अध्यादेश की जगह लेगा। इसके तहत भारत के सर्वोच्च न्यायालय में मुख्य न्यायाधीश को छोडक़र अन्य न्यायाधीशों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने का प्रस्ताव है, ताकि लंबित मामलों के निस्तारण में तेजी लाई जा सके। वहीं सरकार जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 भी लाएगी। इसका उद्देश्य देर से होने वाले जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियमों को और सख्त बनाना है। राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण (संशोधन) विधेयक, 2026 के जरिए 1971 के कानून में संशोधन का प्रस्ताव है।

हालांकि जारी दस्तावेज में संशोधन के विस्तृत प्रावधानों का उल्लेख नहीं किया गया है। जबकि पांचवां महत्वपूर्ण प्रस्ताव सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम विकास (संशोधन) विधेयक, 2026 है। इसके जरिए एमएसएमई क्षेत्र में कारोबार सुगमता बढ़ाने, विलंबित भुगतान के मामलों के समाधान को मजबूत करने, मध्यस्थता के फैसलों के प्रभावी क्रियान्वयन और राज्यों को एमएसएमई फैसिलिटेशन काउंसिल के गठन में अधिक लचीलापन देने का प्रावधान किया गया है।