राज्य सरकार ने इसके लिए हाउसिंग इंडस्ट्री रेग्युलेशन एक्ट (HIRA) अलग कानून बनाकर उसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है।
नई दिल्ली। रीयल एस्टेट सेक्टर में होने वाली गड़बड़ियों को नियंत्रित कर फ्लैट बायर्स के हितों का ध्यान रखने के लिए मोदी सरकार की ओर से बनाए गए रेरा (रीयल एस्टेट रेग्युलेशन एंड डेवलपमेंट एक्ट) के बावजूद पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने अपना अलग कानून बना दिया है। राज्य सरकार ने इसके लिए हाउसिंग इंडस्ट्री रेग्युलेशन एक्ट (HIRA) अलग कानून बनाकर उसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है। गौरतलब है कि केंद्र ने ही इस कानून में आंशिक बदलाव के लिए राज्यों को अधिकार दिए थे।
क्या डेवलपर्स की मदद कर रही हैं ममता?
ममता बनर्जी की इस कवायद को फ्लैट खरीदारों के लिए काम करने वाले संगठनों ने गलत कोशिश करार दिया है। संगठनों का कहना है कि जब केंद्र सरकार कानून बना चुकी है तो पश्चिम बंगाल में अलग से कानून की क्या जरूरत थी। इस कदम के चलते ममता सरकार पर डेवलपर्स की मदद करने का आरोप लग रहा है। सवाल यह भी उठा है कि जब सभी राज्यों ने केंद्र के कानून को स्वीकार किया है और बॉम्बे हाईकोर्ट की ओर से भी इसे बनाए रखने का फैसला आ चुका है तो फिर पश्चिम बंगाल में अलग कानून की जरूरत क्यों पड़ी?
अभी ममता के कानून पर अंतिम मुहर बाकी
आवास मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक ममता सरकार के इस नए कानून को अभी राष्ट्रपति की मंजूरी की जरूरत पड़ेगी क्योंकि ऐसे ही मामलों से निपटने के लिए केंद्र सरकार का कानून अस्तित्व में है। गौरतलब है कि संविधान के अनुच्छेद 254 में उल्लेख किया गया है कि यदि किसी मसले पर राज्य और केंद्र सरकार के कानूनों में टकराव की स्थिति बनती है तो केंद्र के कानून को ही लागू किया जाएगा।