
नई दिल्ली। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले मोदी सरकार का आखिरी और अंतरिम बजट 2019 पेश होने से पहले लीक हो गया है। कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने बजट की संभावित घोषणाओं की एक सूची साझा करते हुए पूछा है कि अगर इनमें कही गईं अधिकतर बातें बजट में परिलक्षित होती हैं तो क्या यह लीक नहीं माना जाएगा? इस सूची में शामिल अहम घोषणाओं में स्वास्थ्य बीमा को सार्वभौमिक करना और यूनिवर्सल बेसिक इनकम से संबंधित घोषणाएं प्रमुख हैं। उन्होंने बजट लीक को एक गंभीर मसला बताया है।
गंभीर लापरवाही
पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता मनीष तिवारी ने अपने ट्वीट में बजट में संभावित घोषणाओं से संबंधित सूची साझा करते हुए लिखा है कि मीडिया के लोग यह बिंदु सरकारी सूत्रों के हवाले से साझा कर रहे हैं। अगर इनमें से सभी या अधिकतर प्रस्ताव बजट में परिलक्षित होते हैं, तो क्या यह बजट लीक नहीं माना जाएगा? मनीष तिवारी ने बजट को लेकर जो सूची साझा की है उनमें इनकम टैक्स छूट की सीमा को 4 लाख से 5 लाख रुपए तक करने, होमलोन के ब्याज पर मिलने वाले टैक्स छूट की सीमा को 2 लाख रुपए से बढ़ाकर 2.50 लाख रुपए किए जाने के आसार है। स्टैंडर्ड डिडक्शन की मौजूदा सीमा को 40,000 रुपए से बढ़ाकर 50,000 रुपए, समय पर लोन चुकाने वाले किसानों को सरकार 2 लाख तक ब्याज मुक्त कर्ज देने का ऐलान शामिल है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में किसानों द्वारा दिए जाने वाले प्रीमियम के हिस्से का भुगतान भी सरकार खुद देने का ऐलान कर सकती है। पहली बार सरकार यूनिवर्सल बेसिक इनकम स्कीम को लागू करने को लेकर रोडमैप और स्टार्टअप पर लगने वाले एंजेल टैक्स को खत्म किया जा सकता है। हेल्थ सेक्टर को बजट में 53,000 करोड़ रुपए और 10,000 नए वेलनेस हेल्थ सेंटर खोलने का ऐलान हो सकता है।
बजट गोपनीय दस्तावेज होता है
बता दें कि बजट एक गोपनीय दस्तावेज होता है। इसे लिखे जाने की प्रक्रिया की शुरुआत वित्त मंत्रालय में हलवा सेरेमनी के साथ होता है। इसके बाद इससे जुड़े सरकारी अधिकारियों को बजट पेश होने तक बाहर जाने की इजाजत नहीं होती है। गोपनियता रखे जाने के बाद भी अगर बजट के अहम बिंदु लीक होते हैं तो विपक्ष इसे लेकर हंगामा करने से पीछे नहीं हटेगा।