केंद्रीय मंत्री ने कहा कि महिला पत्रकारों द्वारा अकबर पर लगाए गए आरोप काफी गंभीर हैं। उन्होंने मामले में बीजेपी पर भी हमला किया।
नई दिल्ली। यौन शोषण के आरोपों में घिरे विदेश राज्यमंत्री और पूर्व पत्रकार एम जे अकबर पर उनके ही सहयोगी मंत्री ने चुप्पी तोड़ी है। केंद्रीय सामाजिक न्याय अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास अठावले कहा कि अगर आरोप सही पाया जाता है तो अकबर को पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। अठावले ने इस मुद्दे पर बीजेपी को भी घेरा है।
सुनना चाहिए अकबर का पक्ष: अठावले
नौ महिला पत्रकारों ने एमजे अकबर पर पत्रकार रहते हुए यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार करने का आरोप लगाया है। इन आरोपों के बाद से सरकार और खुद केंद्रीय मंत्री की ओर से कोई सफाई नहीं आई है। रामदास अठावले ने कहा कि फिलहाल एमजे अकबर अभी देश से बाहर हैं। इस मामले पर हमें उनका पक्ष भी सुनना चाहिए। मामले की जांच होनी चाहिए और अगर जांच में उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही साबित होते हैं तो उन्हें पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
अकबर मामले पर बीजेपी को देना चाहिए जवाब : अठावले
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि महिला पत्रकारों द्वारा अकबर पर लगाए गए आरोप काफी गंभीर हैं। उन्होंने मामले में बीजेपी पर भी हमला किया। अठावले ने कहा कि इस मामले में भारतीय जनता पार्टी को भी बगैर देर किए हस्तक्षेप करना चाहिए। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष अठावले ने कहा कि किसी भी व्यक्ति चाहे वह नेता हो या अभिनेता को महिलाओं के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने का अधिकार नहीं है। हालांकि उन्होंने कहा कि ऐसे आरोपों की सत्यता की जांच करते समय पुलिस को भी काफी सतर्क रहने की जरूरत है ताकि किसी नेता या अभिनेता की छवि खराब न हो।
अकबर के स्वदेश लौटने का फैसला फिलहाल टला
बता दें कि विदेश राज्यमंत्री एमजे अकबर अभी विदेश दौरे पर हैं और शुक्रवार की दोपहर स्वदेश लौटने वाले थे। लेकिन अब आ रही मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वे अन्य देश की यात्रा पर चले गए हैं और रविवार को लौटेंगे। यानी अकबर का दौरा 48 घंटे के लिए आगे बढ़ा दिया गया है और इस बीच बीजेपी किसी गेम प्लान में लगी है ताकि इस मामले से निपटा जा सके। दरअसल #MeeToo अभियान में अकबर का नाम उछलने के बाद से सरकार और बीजेपी लगातार इस पर मंथन कर रहा है कि उनका इस्तीफा कराने या नहीं कराने का क्या प्रभाव होगा। यदि अकबर का इस्तीफा लिया जाता है तो ये वर्तमान सरकार में किसी मंत्री का इस्तीफा लेने का पहला मामला होगा। यही नहीं आने वाले विधानसभा और फिर लोकसभा चुनाव को लेकर मोदी सरकार की मुश्किलें भी बढ़ सकती है। क्योंकि ये पार्टी पर लगने वाला सबसे बड़ा दाग साबित हो सकता है।