केंद्रीय मंत्रिमंडल ने दी मंजूरी, लंबे समय से बेकार पड़ी हैं ऐसी संपत्तियां.
नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने शत्रु संपत्ति को लेकर बड़ा फैसला किया है। इसके तहत 1947 में बंटवारे के समय पाकिस्तान चले गए लोगों की भारत में मौजूद संपत्तियों को बेचा जाएगा। शत्रु संपत्ति कही जाने वाली इस दौलत के हिस्से बेचकर सरकार हजारों करोड़ रुपए जुटाएगी। केंद्रीय कैबिनेट ने इसकी मंजूरी दे दी है। लंबे समय से ऐसी संपत्तियां बेकार पड़ी हैं।
मंत्रिमंडल बैठक में लिए गए फैसलों की जानकारी देते हुए क़ानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने बताया कि अब शत्रु संपत्तियों के संरक्षक के पास मौजूद शेयरों बेचे जाएंगे। मोदी सरकार ने हाल ही में क़ानून बनाकर शत्रु संपत्तियों को बेचने का रास्ता साफ किया था। इन संपत्तियों का बड़ा हिस्सा राजा महमूदाबाद के वंशजों के पास है जिन्होंने इन्हें बेचने के फ़ैसले को कोर्ट में चुनौती दी है। आंकड़ों के मुताबिक शत्रु संपत्ति के तहत आने वाले 6,50,75,877 शेयरों को बेचा जाएगा। 1968 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से इनकी कीमत करीब तीन हजार करोड़ रुपए है। मौजूदा समय में यह शेयर शत्रु संपत्ति के संरक्षक गृह मंत्रालय के कब्जे में हैं।
क्या है शत्रु संपत्ति
शत्रु संपत्ति अधिनियम 1968 के अनुसार शत्रु संपत्ति ऐसी जायदाद है जिसका मालिकाना हक या प्रबंधन ऐसे लोगों के पास था, जो बंटवारे के समय भारत से चले गए थे। इसके अलावा दो देशों के बीच लड़ाई होने की स्थिति में भी सरकार दुश्मन देश के लोगों की जायदाद अपने कब्ज़े में ले लेती है। 1962 में चीन और इसके बाद 1965 और 1971 में पाकिस्तान से युद्ध छिड़ने पर भारत सुरक्षा अधिनियम के तहत इन देशों के नागिरकों की भारत में मौजूद जायदाद अपने कब्जे में ले ली।इसके तहत ज़मीन, मकान, आभूषण या दुश्मन देश के नागरिकों की किसी संपत्ति को कब्जे में लिया जा सकता है।
भारत में इतनी संपत्तियों की पहचान
आंकड़ों के मुताबिक भारत सरकार ने अब तक 9,500 से ज्यादा शत्रु संपत्तियों की पहचान की है, जिसमें सबसे ज्यादा पाकिस्तान नागिरकों की हैं। इनकी देखरेख और मालिकाना हक को लेकर देश की अदालतों में कई मामले लंबित हैं। कैबिनेट के फैसले की जानकारी देते हुए प्रसाद ने कहा, लंबे समय से बेकार पड़ी शत्रु चल संपत्ति को बेचने से हुई आय का इस्तेमाल जनकल्याण के कार्यक्रमों में होगा।