
नई दिल्ली। मोदी सरकार में मंत्री उपेंद्र कुशवाहा 48 घंटे के अंदर अपने बयान से पलट गए। सोमवार को उन्होंने बीपी मंडल जयंती मंच से कही बातों को स्पष्ट करते हुए कहा कि मैंने सामाजिक एकता के मद्देनजर खीर बनाने की बातें की थी। उसी संदर्भ में जातियों के मेल से एक बेहतर समाज निर्माण पर बल दिया था। लेकिन मीडिया में उसका अर्थ कुछ और निकाला गया। जबकि मेरे कहने का तात्पर्य कुछ और था। आज उन्होंने इस मामले में साफ तौर पर स्पष्ट किया किसी राजनीतिक दल के साथ जाति एवं समुदाय की पहचान को सुनिश्चित करना नहीं था।
कुशवाहा ने क्या कहा था
उनके इस बयान के बाद से एक बार फिर उनके राजद के साथ जाने के कयासों को बल मिला था। इससे पहले उन्होंने पटना में मंडल जयंती के अवसर पर कहा कि अगर यदुवंशियों मतलब यादव का दूध और कुशवंशी मतलब कुशवाहा उसमें चावल मिलाये तो दुनिया का सबसे स्वादिष्ट खीर तैयार होगा। फिर उन्होंने अपनी पार्टी के ब्राह्मण नेता शंकर झा आजाद की तरफ इशारा करते हुए कहा कि ये चीनी मिलाएंगे और दलित नेता भूदेव चौधरी उसमें तुलसी डालेंगे। कुशवाहा ने कहा कि अगर यह समीकरण एक साथ हो जाए तो राज्य की सता पर काबिज होना मुश्किल नहीं होगा।
अटकलों पर लगाया विराम
आपको बता दें कि केंद्रीय राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा ने शनिवार को पटना में बीपी मंडल की जयंती पर बड़ा बयान दिया था। उनके बयानों से साफ था कि वो लोकसभा चुनाव एनडीए के साथ नहीं लड़ेगे। हालांकि इस बात की आधिकारिक घोषणा नहीं की थी। लेकिन सुंदर और स्वादिष्ट खीर बनाने का जिक्र उन्होंने जिस अंदाज में किया था उससे इशारे ही इशारे में अटकलों का दौर शुरू हो गया था, जिसका उन्होंने सोमवार को खंडन किया है।
तेजस्वी ने की तारीफ
केंद्रीय मंत्री कुशवाहा के बयान को आरजेडी नेता और लालू के बेटे तेजस्वी यादव ने भी तारीफ की थी। उन्होंने ट्वीट कर कहा था कि नि:संदेह उपेंद्र जी, स्वादिष्ट और पौष्टिक खीर श्रमशील लोगों की जरूरत है। पंचमेवा के स्वास्थवर्धक गुण न केवल शरीर बल्कि स्वस्थ समतामूलक समाज के निर्माण में भी ऊर्जा देता है। प्रेमभाव से बनाई गई खीर में पौष्टिकता स्वाद और ऊर्जा की भरपूर मात्रा होती है। यह एक अच्छा व्यंजन है। मुझे आशा है कि आप इस व्यंजन को बनाने का हर संभव प्रयास करेंगे।