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Patrika Explainer : क्या ‘भतीजामोह’ बन चुका ममता और मायावती की राजनीति की नई चुनौती?

Trinamool Congress Split: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) गंभीर आंतरिक संकट से जूझ रही है। अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व को लेकर पार्टी में बगावत तेज हो गई है, कई सांसद और विधायक अलग राह पकड़ चुके हैं।

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भारत

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Ashib Khan

Jun 12, 2026

Abhishek Banerjee controversy

मायावती और ममता बनर्जी (Photo-IANS)

TMC crisis: पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव हारने के बाद ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस इस समय अपने सबसे बड़े संकट से गुजर रही है। पंचायत स्तर से लेकर संसद तक के नेता पार्टी से इस्तीफा दे रहे हैं। अब टीएमसी संकट की मायावती की पार्टी BSP संकट से तुलना की जा रही है। दरअसल, जब आकाश आनंद को राष्ट्रीय समन्वयक बनाया गया था, तब पार्टी के अंदर बगावत शुरू हो गई थी। हालांकि बाद में मायावती ने आकाश को पार्टी से निकाल दिया था। अब सवाल उठ रहा है कि क्या ममता बनर्जी भी भतीजामोह से निकलकर पार्टी को बचाएगी या फिर अभिषेक बनर्जी के साथ खड़ी रहेगी।

टूट के कगार पर टीएमसी

विधानसभा में पार्टी की दो फाड़ हो चुकी है और एक गुट ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में है। जिसमें करीब 50 से 60 विधायक माने जा रहे है। वहीं अब पार्टी से 19 सांसद भी बागी हो गए है। इसके अलावा राज्य सभा से भी पार्टी के लगातार सांसद इस्तीफा दे रहे हैं। अब तक तीन राज्य सभा सांसद इस्तीफा दे चुके हैं। माना जा रहा है कि आने वाले समय में और भी सांसद इस्तीफा दे चुके हैं। दरअसल, विधानसभा चुनाव हारने के बाद अभिषेक बनर्जी के खिलाफ पार्टी के अंदर विद्रोह शुरू हो गया है।

बागी नेताओं ने अभिषेक के खिलाफ खोला मोर्चा

विधानसभा चुनाव परिणाम में हार के बाद TMC नेताओं ने पार्टी महासचिव अभिषेक बनर्जी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पार्टी की वरिष्ठ सांसद काकोली घोष ने इस्तीफा देते हुए अभिषेक बनर्जी और I-PAC पर गंभीर सवाल उठाए थे। 

दरअसल, पार्टी के 19 सांसदों की लिस्ट भी सामने आई है, जिन्होंने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को पत्र लिखा था और संसद में अलग बैठने की बात कही थी। 

विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद नेता प्रतिपक्ष के लिए जो हस्ताक्षर युक्त पत्र टीएमसी की तरफ से जारी हुआ था, उसको लेकर सवाल उठे थे। ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा ने कहा कि उन्होंने उस पत्र पर साइन नहीं किए थे, लेकिन उनका नाम था। इसके बाद पार्टी ने दोनों नेताओं को निष्कासित कर दिया। 

बाद में पार्टी का एक गुट ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में बागी हो गया और इस गुट में करीब 58 से 60 विधायक माने जा रहे है। विधानसभा स्पीकर ने भी ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष की मान्यता दे दी। 

क्या भतीजामोह में टूट जाएगी पार्टी

ममता बनर्जी के करीबी सांसद कल्याण बनर्जी ने भी गुरुवार को अभिषेक बनर्जी पर सवाल खड़े कर दिए थे। उन्होंने कहा था कि या तो ममता बनर्जी अभिषेक बनर्जी को चुने या मेरे को। ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि क्या भतीजामोह में ममता बनर्जी की पार्टी टूट जाएगी? अभी तक ममता ने पार्टी के अंदर अभिषेक बनर्जी के खिलाफ नेताओं के बयानवाजी पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। 

कैसे मायावती ने बचाई अपनी पार्टी 

टीएमसी में हो रहे इस पूरे घटनाक्रम की तुलना मायावती की पार्टी BSP से हो रही है। बता दें कि लोकसभा चुनाव 2024 के दौरान मायावती ने अपने भतीजे आकाश आनंद को उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था। हालांकि इसके कुछ महीने बाद अचानक पार्टी के सभी पदों से हटा दिया। उस समय मायावती ने कहा था कि जब तक आकाश आनंद में पूरी तरह से राजनीतिक परिपक्वता नहीं आ जाती तब तक उन्हें जिम्मेदारियों से दूर रखा जाएगा। माना जा रहा है कि मायावती के इस फैसले ने अपनी पार्टी को टूटने से बचा लिया। 

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