Navjot Singh Sidhu के इस्तीफे से पंजाब के सियासत में खलबली Aam Aadmi Party ने दिया सिद्धू को ऑफर नवजोत सिंह सिद्धू के इस्तीफे पर Anil vij ने ली चुटकी
नई दिल्ली। पंजाब सरकार के कैबिनेट मंत्री पद से नवजोत सिंह सिद्धू ने इस्तीफा दे दिया है। इसके साथ तरह तरह की राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। हरियाणा के मंत्री Anil Vij ने Navjot Singh Sidhu को बीजेपी का रिजेक्टेड माल कहा, तो Aam Aadmi Party ने सिद्धू को पार्टी में शामिल होने का न्योता दे दिया है।
आप ने कहा- ईमानदार के लिए खुले हैं दरवाजे
पंजाब विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और आप विधायक हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि सिद्धू को अब तुरंत कांग्रेस जैसी भ्रष्ट पार्टी से किनारा कर लेना चाहिए। उन्होंने कहा कि सिद्धू एक साफ-सुथरी राजनीतिक छवि वाले इंसान हैं।
चीमा ने कहा कि बादल परिवार के माफियाराज के खिलाफ सिद्धू का बोलना मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह पसंद नहीं आ रहा था। आम आदमी पार्टी के दरवाजे ईमानदार लोगों के लिए हमेशा खुले हैं।
अनिल विज ने साधा निशाना
हरियाणा के मंत्री अनिल विज से जब सिद्धू ने इस्तीफे पर प्रतिक्रिया मांगी गई तो वे मुस्कुरा पड़े। विज ने चुटकी लेते हुए कहा कि नवजोत सिंह सिद्धू तो बीजेपी के रिजेक्टेड माल हैं। जो बीजेपी से रिजेक्ट होता है वह किसी भी पार्टी में फिट नहीं बैठ सकता है। चाहे सिद्धू इस्तीफा दें या कुछ भी हो लेकिन वे रहेंगे हमेशा रिजेक्टेड माल।
सिद्धू ने छोड़ा कैप्टन का साथ
मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह और सिद्धू के बीच विवाद रविवार को उस समय और गहरा गया जब सिद्धू ने बिजली और नए और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत मंत्रालय से इस्तीफा दे दिया। क्रिकेटर से राजनेता बने सिद्धू ने अपने इस्तीफे में लिखा कि मैं पंजाब मंत्रिमंडल के मंत्री पद से इस्तीफा देता हूं।
सिद्धू ने ट्विटर पर अपना इस्तीफा पोस्ट करते हुए लिखा कि मेरा इस्तीफा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के पास 10 जून 2019 को पहुंच गया था।
सिद्धू और सीएम में चल रही खटपट
बता दें कि नवजोत सिद्धू और सीएम अमरिंदर सिंह में पिछले कई महीने से सब कुछ ठीक नहीं चल रहा था कैप्टन के खिलाफ बोलने की सिद्धू को सजा भी मिल चुकी है।
बीते छह जून को मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने अपनी कैबिनेट में फेरबदल करते हुए सिद्धू का कद घटा दिया। सिद्धू से शहरी निकाय के साथ पर्यटन एवं सांस्कृतिक विभाग वापस ले लिया था। इसकी जगह उन्हें ऊर्जा एवं नवीकरणीय ऊर्जा विभाग का प्रभार सौंपा था।
मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर ने सिद्धू से विभाग वापस लेते हुए इसके लिए उनके खराब प्रदर्शन को जिम्मेदार ठहराया था और इसके बाद से दोनों के बीच तनाव सार्वजनिक हो गया था।