Sedition Law को बनाए रखना जरूरी कांग्रेस ने किया था देशद्रोह कानून को समाप्‍त करने का वादा राज्‍यसभा में टीएमसी-भाजपा के बीच कट मनी पर हुई नोकझोंक
नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से बुधवार को संसद में जानकारी दी गई कि सरकार देशद्रोह कानून ( sedition law ) समाप्त नहीं करेगी। आतंकियों और अलगाववादियों को सबक सिखाने के लिए यह कानूनी प्रावधान आगे भी जारी रहेगा। सरकार के इस रुख से साफ है कि आईपीसी की धारा 124 (A) बनी रहेगी।
केंद्रीय गृह मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में इस बात की जानकारी सदन को दी। सरकार की ओर से कहा गया है कि देशद्रोही, अलगाववादी और आतंकवादी तत्वों से निपटने के लिए इस कानून का रहना आवश्यक है।
कानून का दुरुपयोग कर रही है सरकार
इस मुद्दे पर विपक्ष का आरोप है कि अंग्रेजों के समय के देशद्रोह कानून ( Sedition law ) का सरकारें दुरूपयोग करती आई हैं। अब इसे खत्म करने का समय आ गया है। कांग्रेस ने तो अपने घोषणा पत्र में कह दिया था कि सत्ता में आने पर वो इस कानून को खत्म कर देगी। कांग्रेस के इस रुख से इस मुद्दे पर अनावश्यक रूप से विवाद खड़ा कर दिया था।
देशद्रोह कानून ( Sedition law ) को हटाने के समर्थन में दलील दी जाती रही है कि 1860 में बने इस कानून को अंग्रेजों ने आजादी के आंदोलन को कुचलने के लिए बनाया था। उस समय आज़ादी के सिपाहियों के खिलाफ इस धारा के तहत कार्रवाई की जाती थी। देश के आजाद होने के बाद भी इस धारा को बदला नहीं गया।
कट मनी पर हुई नोकझोंक
TMC सांसद सुदीप बंदोपाध्याय ने बीजपी सांसद लॉकेट चटर्जी के कट मनी वाले बयान को संसद की कार्यवाही से हटाने की मांग की, जिसमें ममता बनर्जी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। इस पर BJP और TMC सांसदों के बीच जमकर नोकझोंक हुई। स्पीकर ने कहा कि इस सदन को बंगाल विधानसभा बनाने की कोशिश मत कीजिए।
जया बोलीं, उठाती रहूंगी मुद्दा
बुधवार को राज्यसभा में सपा सांसद जया बच्चन ने कहा कि महिलाओं का मुद्दा बार-बार उठाऊंगी। जब तक मुझे इसका समाधान नहीं मिलेगा। जब तक कार्रवाई नहीं होगी। तब तक यह मुद्दा उठाऊंगी। यह मेरा संकल्प है।
अपत्ति नहीं जताई
वहीं राज्यसभा में BJP के नेता थावरचंद गहलोत ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अन्य पिछड़ी जाति (OBC) वर्ग की 17 जातियों को अनुसूचित जाति (SC) का प्रमाणपत्र दिए जाने को लेकर मंगलवार को राज्यसभा में दिए अपने बयान पर कहा- ऐसा नहीं है कि मैं इस पर आपत्ति उठा रहा हूं। मैंने सिर्फ नियम तथा निर्धारित प्रक्रिया सामने रखे हैं। मैंने वही कहा जो मैं सदन में कहना चाहता था।