
शुभेन्दु अधिकारी को बीजेपी ने पश्चिम बंगाल में अपना पहला सीएम बनाया है। (फोटोःIANS)
पश्चिम बंगाल देश के कुछ गिने-चुने राज्यों में है, जहां आजादी के बाद मुख्यमंत्रियों की संख्या दस या उससे कम रही हो। यहां 9 मई 2026 से भाजपा के शुभेन्दु अधिकारी मुख्यमंत्री होंगे। लेकिन, बंगाल में एक अपवाद को छोड़ कर सारे सीएम अगड़ी जाति (कायस्थ या ब्राह्मण) के ही हुए हैं। यह परंपरा 2026 में भी नहीं टूटी है।
पश्चिम बंगाल में सारे सीएम के अगड़ी जाति के होने के पीछे शायद एक वजह यह हो कि वहां चुनावों में जातिगत समीकरण उतना हावी नहीं होता जितना बिहार-उत्तर प्रदेश या दक्षिण के राज्यों में होता है।
| नाम | आयु (शपथ के समय) | जाति | कार्यकाल |
| प्रफुल्ल चंद्र घोष | 55 वर्ष | ओबीसी | 1947–1948, 1967–1968 |
| बिधान चंद्र रॉय | ~65 वर्ष | कायस्थ | 1948–1962 |
| प्रफुल्ल चंद्र सेन | 65 वर्ष | वैद्य (कायस्थ) | 1962–1967 |
| अजय कुमार मुखर्जी | 65 वर्ष | ब्राह्मण | 1967, 1969–1970, 1971 |
| सिद्धार्थ शंकर राय | 51 वर्ष | कायस्थ | 1972–1977 |
| ज्योति बसु | 62 वर्ष | कायस्थ | 1977–2000 |
| बुद्धदेव भट्टाचार्य | 56 वर्ष | ब्राह्मण | 2000–2011 |
| ममता बनर्जी | 56 वर्ष | ब्राह्मण | 2011–2026 |
| शुभेंदु अधिकारी | 55 वर्ष | ब्राह्मण | 2026–वर्तमान |
पश्चिम बंगाल की राजनीति में 1977 तक (कुछ साल छोड़ कर) पूरी तरह कांग्रेस का दबदबा रहा था। फिर वामपंथियों का दौर शुरू हुआ, जो 2011 में ममता बनर्जी के आने तक जारी रहा। इस दौर को 2026 में बीजेपी ने खत्म किया। नीचे टेबल में देख सकते हैं कि किस चुनाव में कितनी सीटें लाकर किस पार्टी ने अपना दबदबा रखा:
| चुनाव वर्ष | पहला दल (सीटें) | दूसरा दल (सीटें) | तीसरा दल (सीटें) | चौथा दल (सीटें) | अन्य | कुल सीटें |
| 1952 | 🔵 INC (150) | 🔴 CPI (28) | 🟠 KMPP (15) | 🟤 AIFB (11) | 34 | 238 |
| 1957 | 🔵 INC (152) | 🔴 CPI (46) | 💗 PSP (21) | 🔵 AIFB (8) | 25 | 252 |
| 1962 | 🔵 INC (157) | 🔴 CPI (50) | 🟤 AIFB (13) | 🔵 RSP (9) | 23 | 252 |
| 1967 | 🔵 INC (127) | 🔴 CPI(M) (43) | 🔵 BC (34) | 🔴 CPI (16) | 60 | 280 |
| 1969 | 🔴 CPI(M) (80) | 🔵 INC (55) | 🔵 BC (33) | 🔴 CPI (30) | 82 | 280 |
| 1971 | 🔴 CPI(M) (113) | 🟢 INC(R) (105) | 🔴 CPI (13) | 🔵 SUCI (7) | 56 | 280 |
| 1972 | 🟢 INC(R) (216) | 🔴 CPI (35) | 🔴 CPI(M) (14) | 🔵 RSP (3) | 26 | 280 |
| 1977 | 🔴 CPI(M) (178) | 🔵 JP (29) | 🔵 AIFB (25) | 🟢 INC(R) (20) | 42 | 294 |
| 1982 | 🔴 CPI(M) (174) | 🟢 INC(I) (49) | 🔵 AIFB (28) | 🔵 RSP (19) | 24 | 294 |
| 1987 | 🔴 CPI(M) (187) | 🟢 INC(I) (40) | 🔵 AIFB (26) | 🔵 RSP (18) | 23 | 294 |
| 1991 | 🔴 CPI(M) (182) | 🔵 INC (43) | 🔵 AIFB (29) | 🔵 RSP (18) | 22 | 294 |
| 1996 | 🔴 CPI(M) (153) | 🔵 INC (82) | 🔵 AIFB (21) | 🔵 RSP (18) | 20 | 294 |
| 2001 | 🔴 CPI(M) (143) | 🟢 AITC (60) | 🟢 INC (26) | 🟤 AIFB (25) | 40 | 294 |
| 2006 | 🔴 CPI(M) (176) | 🟢 AITC (30) | 🔵 AIFB (23) | 🔵 INC (21) | 44 | 294 |
| 2011 | 🟢 AITC (184) | 🔵 INC (42) | 🔴 CPI(M) (40) | 🟤 AIFB (11) | 17 | 294 |
| 2016 | 🔵 AITC (211) | 🔵 INC (44) | 🔴 CPI(M) (26) | 🟠 BJP (3) | 10 | 294 |
| 2021 | 🟢 AITC (215) | 🟠 BJP (77) | 🔵 ISF (1) | 🟢 GJM (1) | 0 | 294 |
| 2026 | 🟠 BJP (207) | 🟢 AITC (80) | 🔵 INC (2) | 🔵 AJUP (2) | 🔴 CPI(M) (1) | 293 |
2026 में पश्चिम बंगाल में सत्ता का नया दौर (दक्षिणपंथी भाजपा शासन का) तो शुरू हो गया है, लेकिन सत्ता पर अगड़ी जाति के नियंत्रण का दौर नहीं बदला है। हालांकि पश्चिम बंगाल ऐसा इकलौता राज्य नहीं है। 'हिंदुस्तान टाइम्स' ने एक रिसर्च किया है। इसमें बताया गया है कि किस राज्य में किस समुदाय का मुख्यमंत्री औसतन कितने दिन शासन में रहा है। इसमें चार समुदाय को जेनेरल, मुस्लिम, एससी और ओबीसी के रूप में लिया गया है। जेनेरल कैटेगरी (मुख्यतः अगड़ी जातियां) में बंगाल भले सबसे ऊपर है, लेकिन आंध्र प्रदेश, हरियाणा, ओड़ीशा, पंजाब भी आस-पास ही हैं। देखिए ये टेबल
| राज्य (State) | सामान्य (GEN) | मुस्लिम (Muslim) | अनुसूचित जाति (SC) | अनुसूचित जनजाति (ST) | अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) |
| पश्चिम बंगाल | 99.7 | - | - | - | 0.3 |
| आंध्र प्रदेश | 97 | - | 3 | - | - |
| हरियाणा | 95.4 | - | - | - | 4.6 |
| ओडिशा | 92 | - | - | - | 4.4 |
| पंजाब | 91.5 | - | 0.7 | - | - |
| राजस्थान | 74.9 | 1.5 | - | - | 23.6 |
| केरल | 73.9 | - | - | - | 26.1 |
| महाराष्ट्र | 73.6 | 2.7 | - | - | 23.7 |
| मध्य प्रदेश | 69 | - | - | - | 31 |
| गुजरात | 63.8 | - | - | 36.2 | - |
| उत्तर प्रदेश | 63.1 | - | 36.9 | - | - |
| छत्तीसगढ़ | 59 | - | - | 41 | - |
| तमिलनाडु | 45.1 | - | - | - | 54.9 |
| असम | 42.8 | - | - | 57.2 | - |
| बिहार | 41.2 | 3.5 | - | - | 55.3 |
| कर्नाटक | 25 | - | - | - | 75 |
| झारखंड | - | - | - | 87 | 13 |
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्रियों की बात करें तो एक बात और नजर आती है। इस पद पर शहरी लोगों का ही कब्जा रहा है। उसमें भी ज़्यादातर कोलकाता (कलकत्ता) के लोगों का ही। नौ में से सात मुख्यमंत्री कोलकाता के ही रहे हैं। जबकि, विधान सभा में कोलकाता की सीटें महज 3.75 प्रतिशत हैं। यह 2011 के आधार पर है। 1977 से 2011 के बीच की बात करें, तब भी यह 7.14 प्रतिशत था।
पश्चिम बंगाल भारत का इकलौता राज्य है जहां नौ में से सात सीएम राजधानी या एक ही शहर से हुए हैं। हालांकि, इस मामले में शुभेन्दु अधिकारी अलग हैं, वह कोलकाता से नहीं हैं। वह मिदनापुर के हैं। इनसे पहले एक अजय मुखर्जी ही हुए, जो ईस्ट मिदनापुर के थे।
शुभेन्दु अधिकारी के बारे में जानने के लिए यहां क्लिक करें।
9 मई को शुभेन्दु अधिकारी के शपथ ग्रहण के मद्देनजर कोलकाता में सुरक्षा तैयारी जबरदस्त है। शपथ से तीन दिन पहले उनके पीए की हत्या हो गई थी और शपथ में प्रधानमंत्री सहित तमाम वीआईपी आ रहे हैं।
Updated on:
09 May 2026 10:12 am
Published on:
09 May 2026 08:20 am
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