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12 साल में 15 राज्यों में कैसे फैल गई बीजेपी की सत्ता? मोदी-शाह के काल में कितनी बदली बीजेपी

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) एक नए राज्य (पश्चिम बंगाल) में सरकार बनाने जा रही है। 12 साल में भाजपा/एनडीए ने 15 राज्यों (7 से 22) में अपने शासन का विस्तार किया है। इस विस्तार के पीछे की ताकत समझते हैं।

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भारत

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Vijay Kumar Jha

May 07, 2026

Narendra Modi popularity

CM और PM बनने के बाद नरेंद्र मोदी एक भी चुनाव नहीं हारे (Photo-IANS)

भाजपा की सबसे बड़ी ताकत हैं कार्यकर्ता। इस ताकत को मजबूत करने पर शुरू से ही उसने काफी ध्यान दिया। 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही इस पर बहुत तेजी से काम हुआ। पार्टी ने सदस्यता अभियान चला कर कार्यकर्ता जोड़े। भाजपा खुद को विश्व का सबसे बड़ा पार्टी बताती है। फिर भी, जरूरत पड़ने पर चुनाव के वक्त पैसे देकर काम करने वाले लोग रखने से परहेज नहीं करती है। मतलब जो रणनीति बनी उसे जमीन पर उतारने के लिए लोगों की कमी नहीं होगी।

ज्यादा से ज्यादा सदस्य बनाने और बचे लोगों को समर्थक बनाने की उसकी कोशिश का ही नतीजा है कि आज भाजपा किसी भी जाति-धर्म-समुदाय के लिए अछूत नहीं है। पश्चिम बंगाल के भवानीपुर में हर समुदाय के लोग हैं। फिर भी भाजपा के उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी करीब 15 हजार वोटों के अंतर से जीते।

भवानीपुर विधान सभा चुनाव परिणाम 2026

क्र.सं.उम्मीदवारपार्टीEVM वोटपोस्टल वोटकुल वोटवोट प्रतिशत (%)
1अधिकारी शुभेंदुभारतीय जनता पार्टी73,46345473,91753.02
2ममता बनर्जीऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस58,34946358,81242.19
3प्रदीप प्रसादइंडियन नेशनल कांग्रेस1,243141,2570.9
4श्रीजीब विश्वासकम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी)3,513433,5562.55
5अनुमिता शॉसोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट)21722190.16
6मणिका मुखर्जीभारतीय न्याय-अधिकार रक्षा पार्टी703730.05
7मलय गुहा रॉयनिर्दलीय (Independent)671680.05
8मुमताज अलीनिर्दलीय (Independent)790790.06
9नारायण दासनिर्दलीय (Independent)831840.06
10सफर शेखनिर्दलीय (Independent)710710.05
11एसके सफी अहमदनिर्दलीय (Independent)14111420.1
12सुब्रत बोसनिर्दलीय (Independent)30513060.22
13नोटा (NOTA)इनमें से कोई नहीं817128290.59
कुल योग1,38,4189951,39,413

राज्य में 90 फीसदी से ज्यादा हिंदू मतदाताओं वाली 49 की 49 सीटें भाजपा ने अपने पाले में कर लीं। मुस्लिम बहुल कुछ सीटों पर भी पार्टी का अच्छा प्रदर्शन रहा। पश्चिम बंगाल में राज्य की कुल करीब आधी आबादी ने भाजपा को वोट दिया।

पार्टी ने आज लोगों (कार्यकर्ताओं या पैसे देकर रखे गए लोगों) की ऐसी मशीनरी खड़ी कर ली है कि कोई भी नरेटिव जनता तक पहुंचाने में वह अक्सर कामयाब हो जाती है।

समय के मुताबिक बदलता गया हिंदुत्व का चेहरा

पार्टी में एक और बड़ा बदलाव इस रूप में देखा गया है कि वह हिंदुत्व पर अपना रुख लगातार बदलती रही है। जहां जैसा 'हिंदू कार्ड' खेलना जरूरी समझा गया, वहां वैसा खेला गया। उत्तर प्रदेश में मुजफ्फरनगर दंगों के बाद हुए चुनाव में अमित शाह ने साफ कहा, 'यह चुनाव बदले के लिए है।' इस बार बंगाल के चुनाव में भी भाजपा के हिंदुत्व का एक अलग रूप दिखा, जब पार्टी के नेताओं ने कैमरे के सामने मछली खाई।

पार्टी ने अपना विस्तार करने के लिए रणनीतिक तौर पर अपनी कट्टर हिंदुत्व वाली छवि को नरम किया और काल-परिस्थिति के अनुसार बदला। 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि लोक सभा में सबसे बड़ा दल बन कर आने के बावजूद कई पार्टियां भाजपा को अछूत मानती हैं। 2014 के बाद वह स्थिति बिल्कुल नहीं रही है। तभी भाजपा ने खुद या सहयोगियों के साथ मिल कर 12 साल में 15 राज्यों में सत्ता का विस्तार कर लिया है।

ऐसे होता गया बीजेपी/एनडीए का सत्ता-विस्तार

वर्षभाजपा+ (NDA) शासित राज्यकांग्रेस+ शासित राज्यअन्य/क्षेत्रीय दलकुल राज्य/UT
मई 2014714728
मई 2018204728
मई 2022185728 + केंद्र शासित प्रदेश
मई 2026 (अनुमानित)226328 + केंद्र शासित प्रदेश

मोदी 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री और 2014 में प्रधानमंत्री बने। तब से कोई भी चुनाव नहीं हारे। न गुजरात में और न केंद्र में। इस बीच उन्होंने सरकारी योजनाओं और फैसलों के जरिए भी अपने समर्थकों का बड़ा आधार तैयार किया। जन-धन खाता, उज्ज्वला योजना, आयुष्मान योजना, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना…। लिस्ट लंबी है। नोटबंदी जैसे फैसले को भी उन्होंने इस रूप में प्रचारित किया कि यह भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में 125 करोड़ जनता का योगदान होगा।

बीजेपी/एनडीए शासित मई 2014 (प्रतिशत)मई 2026
जनसंख्या (By Population)22%78% (लगभग 110 करोड़ लोग)
क्षेत्रफल (By Area)34%76%

मोदी की 'हवा' बनती गई और बिखरा, कमजोर व निष्क्रिय विपक्ष के चलते बिना किसी बाधा के बहती गई। कभी बीजेपी के बड़े नेता रहे केएन गोविंदाचार्य ने कहा था कि नरेंद्र मोदी की सबसे बड़ी ताकत है राजनीतिक मार्केटिंग और उनके लिए राजनीति का मतलब है सत्ता। सत्ता चुनाव से आती है। चुनाव छवि की लड़ाई है। मतलब राजनीति छवि के इर्द-गिर्द घूमती है। इसके लिए किसी भी नेता के पास तीन चीजें होनी चाहिए: बुनियादी सुविधाएं (infrastructure), संसाधन (resource)और तकनीक (technology)।

इन तीन मामलों में आज बीजेपी के टक्कर में कोई नहीं है। मोदी ने अलग-अलग समूहों के लिए अपनी अलग-अलग छवि गढ़ी है। आरएसएस के लिए वह हिंदूवादी नेता हैं, शहरी मध्य वर्ग के लिए विकास करने, नौकरी देने वाले नेता, राष्ट्रवादियों के लिए पाकिस्तान और मुस्लिमों की अक्ल ठिकाने लगाने वाले नेता…। इस छवि को बनाए रखना और भुनाते रहना मोदी और भाजपा की कामयाबी का बड़ा आधार है।

इस तथ्य से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि अपनी अलग-अलग छवियों के दम पर मोदी ने हर वर्ग में अपने समर्थक बनाए हैं और जननेता के रूप में राजनीति में खुद को स्थापित किया है। गांधी परिवार से बाहर, अटल बिहारी वाजपेयी के अलावा देश का कोई प्रधानमंत्री लोकप्रियता के मामले में इस स्तर तक नहीं पहुंच पाया है।