
शुरुआती रुझानों में बीजेपी को मिल रही बढ़त (Photo-IANS)
West Bengal Election Result 2026: पश्चिम बंगाल में अब तक हुई मतगणना से साफ हो गया है कि सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को भाजपा से जबर्दस्त टक्कर मिल रही है। यह भी साफ है कि भाजपा का प्रदर्शन इस बार भी पिछली बार की तुलना में अच्छा रहने वाला है। 2011 से ही भाजपा लगातार पश्चिम बंगाल में अपनी स्थिति मजबूत करती आ रही है। इस चुनाव में उसकी स्थिति और मजबूत होने के क्या कारण हो सकते हैं? जानते हैं:
Double M फैक्टर: ममता की जीत के पीछे दो "M" का हाथ रहा है- मुस्लिम और महिला। इस बार दोनों पर प्रहार हुआ। एसआईआर की वजह से मुस्लिम मतदाता कम हुए और बीजेपी ने चुनाव घोषणापत्र, प्रचार, उम्मीदवार चयन के जरिए महिलाओं को साधा। बीजेपी महिलाओं के बीच यह संदेश देने में सफल रही कि वह टीएमसी का विकल्प बन सकती है।
चुनाव के बीच महिला केंद्र सरकार ने आरक्षण संशोधन बिल पास कराने की कवायद की तो बीजेपी ने इसे भी महिलाओं का समर्थन जुटाने के लिए एक अभियान के रूप में इस्तेमाल किया। महिलाओं के लिए कई चुनावी वादे भी किए गए।
महिला आरक्षण: पुलिस और पश्चिम बंगाल सरकार की नौकरियों में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण।
महिला सुरक्षा और सशक्तीकरण: केवल महिलाओं वाली पुलिस बटालियन और 'दुर्गा सुरक्षा स्क्वाड' के माध्यम से महिला सुरक्षा और सशक्तिकरण पर ध्यान केंद्रित करना।
महिलाओं के लिए मासिक सहायता: महिलाओं के लिए 3,000 रुपये की मासिक वित्तीय सहायता।
गर्भवती महिलाओं के लिए सहायता: आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की गर्भवती महिलाओं के लिए 21,000 रुपये और छह पोषण किट।
मुफ्त परिवहन: राज्य द्वारा संचालित सभी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा की सुविधा।
उच्च शिक्षा हेतु सहायता: उच्च शिक्षा में महिलाओं को सहयोग देने के लिए स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश के समय लड़कियों को 50,000 रुपये प्रदान करना।
इनके अलावा भी कुछ ऐसी घोषणाएं कीं जिनका फायदा महिलाओं को भी मिलेगा। जैसे:
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी: प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सहायता के लिए 15,000 रुपये की एकमुश्त वित्तीय सहायता।
रोजगार: अगले पांच वर्षों में 1 करोड़ नई नौकरियों और स्वरोजगार के अवसर प्रदान करना।
बेरोजगारों के लिए सहायता: प्रत्येक बेरोजगार युवा को 3,000 रुपये की वित्तीय सहायता।
नकद सहायता का वादा पिछले कई चुनावों में सत्ता पाने का कामयाब नुस्खा साबित हो चुका है। महाराष्ट्र, दिल्ली, हरियाणा, बिहार सब जगह यह फार्मूला सफल रहा है।
भाजपा ने सरकार बनने के छह महीने के भीतर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) लागू करने का भी वादा किया।
Anti Incumbancy: ममता बनर्जी 2011 से सीएम हैं। इस बार उन्हें ज्यादा सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा है। भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, अपराध, टीएमसी कार्यकर्ताओं की कथित गुंडागर्दी को बीजेपी ने बड़ा मुद्दा बनाया और ज़ोर-शोर से जनता तक पहुंचाया।
Polarisation: इस बार के चुनाव में ध्रुवीकरण भी खूब हुआ। बीजेपी ने घुसपैठ का मुद्दा उठा कर गैर मुस्लिम वोटर्स को अपने पक्ष में करने की पुरजोर कोशिश की।
Election Management: पश्चिम बंगाल में बीजेपी को 2016 में 3 सीटें मिली थीं। 2021 में 77 मिलीं। 2021 में उसका वोट प्रतिशत 38 तक पहुंच गया था। यह बीजेपी के लिए संकेत था कि बंगाल में वह टीएमसी का विकल्प बन सकती है। पिछले चुनाव में कई सीटें ऐसी थीं जहां बीजेपी के उम्मीदवार अपेक्षाकृत काफी कम मार्जिन से हारे थे। उन सीटों पर बीजेपी के लिए संभावनाएं बाकी थीं। बीजेपी ने संभावनाओं को अवसर में बदलने के लिए पूरी ताकत लगा दी।
इस बार भाजपा का चुनाव प्रचार भी थोड़ा अलग रहा । भाजपा की ओर से चुनाव प्रचार आक्रामक तो रहा ही, बांग्ला संस्कृति से भी जोड़ा गया। भाजपा नेताओं ने मछली को मुद्दा बनाया और कहा की टीएमसी सरकार बंगाल के लोगों को पर्याप्त मछली तक उपलब्ध नहीं करवा रही है। बीजेपी नेताओं ने कैमरे के सामने मछली खाई। प्रधानमंत्री ने झालमूढ़ी खाई।
Updated on:
04 May 2026 10:59 am
Published on:
04 May 2026 10:10 am
