नई दिल्ली। राज्यसभा की 37 सीटों के चुनाव लिए नामांकन दाखिल करने के साथ ही तस्वीर भी साफ होने लगी है। जहां बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद) के शरद पवार, कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य व वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी समेत कई अन्य की जीत तय दिख […]
नई दिल्ली। राज्यसभा की 37 सीटों के चुनाव लिए नामांकन दाखिल करने के साथ ही तस्वीर भी साफ होने लगी है। जहां बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद) के शरद पवार, कांग्रेस कार्यसमिति सदस्य व वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी समेत कई अन्य की जीत तय दिख रही है। जबकि असम, हरियाणा, ओडिशा व बिहार में क्रॉस वोटिग का खेल देखने को मिल सकता है।
बिहार में पांच सीट के लिए छह उम्मीदवार खड़े हुए हैं। ऐसे में यहां मतदान तय दिख रहा है। हालांकि एनडीए के नीतीश, रामनाथ ठाकुर, नितिन नवीन और शिवेश कुमार की जीत तय हैं। जबकि पांचवी सीट के लिए घमासान मचा हुआ है। राष्ट्रीय लोक मोर्चा (रालोमो) के प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा और राजद के अमरेंद्र धारी सिंह चुनाव में खड़े तो हो गए हैं, लेकिन दोनों के पास जीत लायक वोट नहीं है। राजद, कांग्रेस और लेफ्ट पार्टियों के विधायक मिलाने पर भी 41 प्रथम वरीयता के वोट नहीं हो पा रहे हैं। ऐसे में यहां एआईएमआईएम और बसपा किंग मेकर बने हुए हैं।
ओडिशा से 4 सीटें हैं। यहां एक सीट पर कड़ी टक्कर की संभावना है। सत्ताधारी भाजपा ने प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा सांसद सुजीत कुमार को उतारा है। बीजद से संत्रुप्त मिश्रा और डॉ. दत्तेश्वर होटा ने नामांकन किया है। एक स्वतंत्र उम्मीदवार दिलीप राय (भाजपा समर्थित) भी मैदान में हैं, जिससे क्रॉस-वोटिंग के भरोसे चुनाव हो गया है।
महाराष्ट्र्र से सबसे ज्यादा 7 सीटें हैं। महायुति गठबंधन के 6 उम्मीदवारों में केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले, पूर्व मंत्री विनोद तावड़े शामिल हैं। पार्थ पवार (अजित पवार के बेटे) और शिवसेना (शिंदे गुट) से ज्योति वाघमारे भी मैदान में हैं। रामनाथ ठाकुर और रामदास आठवले दोबारा पहुंच सकते हैं। महाविकास अघाड़ी ने शरद पवार को मैदान में उतारा है। इन सभी का निर्विरोध जीतना तय दिख रहा है।
हरियाणा की 2 सीटों में से एक पर मुकाबला हो सकता है। कांग्रेस के पास 37 विधायक हैं, एक सीट के लिए 31 वोट चाहिए। यहां सतीश नांदल निर्दलीय, भाजपा से संजय भाटिया और कांग्रेस से करमवीर सिंह बौध उम्मीदवार हैं। पिछले चुनाव में कांग्रेस विधायकों की क्रॉस वोटिंग के चलते भाजपा समर्थित उम्मीदवार जीत गया था। भाजपा एक बार फिर इतिहास दोहराने की कोशिश में लगी है।
पश्चिम बंगाल की 5 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस के चार उम्मीदवार, भाजपा के एक, असम में एनडीए के तीनों, तेलंगाना में कांग्रेस के दोनों उम्मीदवारों की निर्विरोध जीत तय है। छत्तीसगढ़ में एक भाजपा और एक कांग्रेस तथा हिमाचल की एक सीट पर कांग्रेस की जीत निर्विरोध होती दिख रही है। जबकि तमिलनाडु की 6 सीटों पर अन्नाद्रमुक, पीएमके, द्रमुक, कांग्रेस और डीएमडीके के उम्मीदवार खड़े हैं।