असम में सुरक्षा के मद्देनजर सात जिलों में कर्फ्यू लागू है। सीएम सोनोवाल ने लोगों से शांति बनाए रखने की सबसे अपील की।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर असम में भारतीय नागरिकता को लेकर दूसरा और फाइनल लिस्ट जारी कर दी गई है। फाइनल लिस्ट के मुताबिक में असम रहने वाले दो करोड़ 89 लाख लोग भारतीय नागरिक हैं। जबकि 40 लाख लोग अवैध हैं। यानी ये लोग भारतीय नागरिक नहीं है। ये लोग पिछले कुछ दशकों के दौरान गैर कानूनी तरीके से बांग्लादेश-भारत की सीमा को पारकर असम पहुंचे और वहां पर रहने लगे। अब इन लोगों को असम से वापस बांग्लादेश भेजने की चुनौती सीएम सोनोवाल सरकार के समक्ष है।
55 हजार कर्मचारियों ने दिया इस काम को अंजाम
सुप्रीम कोर्ट के गाइडलाइन के आधार पर इस सूची को तैयार किया गया है। असम सरकार ने इस सूची को तैयार करने में केंद्र सरकार के साथ मिलकर समन्वयक की भूमिका निभाई है। जब से सोनोवाल असम के सीएम बने तभी से उन्होंने इस मुद्दे पर उनकी सरकार काम कर रही है। दो साल से असम सरकार के 55 हजार अधिकारी और कर्मचारी इसी मिशन पर काम कर रहे थे। तब जाकर यह काम पूरा हुआ है। इसकी पहली सूची बहुत पहले जारी की जा चुकी थी। लेकिन विरोध की वजह से सुप्रीम कोर्ट के निर्देश में फाइनल सूची जारी की गई है।
40 साल में कांग्रेस नहीं कर पाई ये काम
आपको बता दें कि असम में बांग्लादेशी घुसपैठिए की समस्या आजादी के बाद से ही है। लेकिन इसने 1971 में बांग्लादेश अलग राष्ट्र के रूप में अस्तित्व में आने के बाद से जोर पकड़ लिया था। दशकों से बड़ी संख्या में बांग्लादेशी घुसपैठिए की वजह से असम के कई जिलों में मूल असमी लोग अल्पसंख्यक हो गए थे। इसके बात को लेकर असम में आंदोलन भी चला। कई बार सांप्रदायिक देंगे भी हुए। 40 साल पहले इस दंगों और आंदोलनों को देखते हुए तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने प्रदेश के लोगों से वादा किया था वो मूल असमियां लोगों की एनआरसी तैयार करेंगे। लेकिन 2016 तक कांग्रेस सरकार लोगों को दिलास देती रही पर इस योजना पर काम शुरू नहीं कर पाई। 2016 विधानसभा चुनाव में सीएम सोनोवाल ने प्रदेश के लोगों से वादा किया था कि वो एनआरसी के काम को पूरा कर दिखाएंगे। उन्होंने दो साल में यह काम पूरा कर एक इतिहास रच दिया है।
अशांति की आशंका को देखते हुए सुरक्षा का सख्त पहरा
असम में नेशनल सिटिजनशिप रिकॉर्ड्स (एनआरसी) का अंतिम ड्राफ्ट जारी हो गया है। असंतुष्ट लोगों के विरोध और कानून व्यवस्था को अपने हाथ में लेने की आशंका को देखते हुए प्रदेश के सात जिलों में कर्फ्यू लागू कर दिया गया है। पूरे राज्य में कानून व्यवस्था के लिहाज से सभी जिलों के डीएम और एसएसपी से स्थिति को नियंत्रण में बनाए रखने को कहा गया है। आपको बता दें कि एनआरसी ड्राफ्ट का प्रदेश का एक तबका विरोध कर रहा है।