ओडिशा के पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता बिष्णब चरण पारिदा का आज भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया।
नई दिल्ली। ओडिशा के पूर्व सांसद और वरिष्ठ नेता बिष्णब चरण पारिदा का आज भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 77 वर्ष के थे। पारिदा कैंसर रोग से ग्रसित थे, जिसके चलते उनको हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। लंबे समय से चल रहे इलाज के बाद उन्होंने गुरुवार को आखरी सांस दी। पारिदा के जाने-माने राजनीतिज्ञ, कॉलमिस्ट और सोशल वर्कर थे। वह लंबे समय से उड़ीसा आधिकारिक भाषा अधिनियम, 1954 लाने के लिए संघर्षरत थे। पारिदा के निधन पर राजनीतिक हस्तियों ने शोक प्रकट किया हैं।
जन्म 1941 में जजपुर में हुआ
वरिष्ठ नेता जुलाई 2010 में राज्य सभा के लिए चुने गए थे और उनका कार्यकाल 1 जुलाई, 2016 को समाप्त हुआ था। पारिदा का जन्म 1941 में जजपुर में हुआ था। वह 1960 से 1992 तक भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के सदस्य रहे। बाद में उन्होंने कुछ कारणों के चलते सीपीआई से इस्तीफा दे दिया था।
1993 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल
1993 में वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हो गए। 1998 तक वह कांग्रेस में थे लेकिन राज्य नेतृत्व के साथ कुछ मतभेदों के कारण उन्होंने पार्टी छोड़ दी और 1999 में समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए। समाजवादी पार्टी ने उनको राज्य का पार्टी अध्यक्ष बनाया। 2008 तक वह समाजवादी पार्टी में थे, जिसके बाद उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देकर वह बीजेडी का दामन थाम लिया।
मॉस्को विश्वविद्यालय से एम.फिल
उनके पिता जगन्धु पारिदा कोलकाता में जूट मिल में एक कर्मचारी थे और एक लोक गायक थे। उनकी मां सुलोचना पारिदा एक गृहिणी थीं। उनकी शुरुआती पढ़ाई मंगलपुर प्राथमिक विद्यालय में हुई थी। अपने मैट्रिक के बाद, वह अपने उच्च अध्ययन जारी रखने के लिए कोलकाता चले गए क्योंकि उनके पिता वहां काम कर रहे थे। उन्होंने कोलकाता में बंगाबासी कॉलेज से ग्रेजुएशन और कोलकाता विश्वविद्यालय से एमए पॉलिटिकल साइंस की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने मॉस्को विश्वविद्यालय से एम.फिल पूरा किया।