
नई दिल्ली। मोदी सरकार ( Modi Government ) ने मंगलवार को एक बड़ा फैसला लेते हुए जम्मू-कश्मीर ( Jammu Kashmir ) को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ दिया है यानी कि केंद्र सरकार ने नए कानून को लेकर नोटिफाई कर दिया है। अब जम्मू-कश्मीर में भी देश के बाकी हिस्सों की तरह सबकुछ एक समान नियम कानून लागू होंगे।
इस नोटिफिकेशन के बाद अब देश का कोई भी नागरिक जम्मू-कश्मीर में जमीन खरीद सकता है। इससे पहले सिर्फ जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को ही जमीन खरीदने की अनुमति थी। हालांकि जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ( Lt. Governor Manoj Sinha ) ने यह साफ किया है कि नया कानून कृषि भूमि पर लागू नहीं होगा।
सरकार ने एक गजट अधिसूचना में जम्मू और कश्मीर विकास अधिनियम की धारा 17 से 'राज्य के स्थाई निवासी' वाक्यांश को हटा दिया है। यह वाक्यांश केंद्र शासित प्रदेश में भूमि के निपटान से संबंधित है। बता दें कि पिछले साल अगस्त में केंद्र सरकार की ओर से राज्य का विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को निष्प्रभावी बनाने के साथ दो अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद ही इस बदलाव का रास्ता साफ हो गया था।
महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला ने जताया विरोध
मोदी सरकार के इस फैसले पर एक बार फिर से कई पार्टियों ने विरोध जताया है। पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती ( PDP Chief Mehbooba Mufti And National Conference Leader Omar Abdullah ) ने विरोध किया है। उमर अब्दुल्ला ने ट्वीट करते हुए लिखा 'जम्मू कश्मीर में जमीन के मालिकाना हक में संशोधन अस्वीकार्य है। यहां तक कि जब गैर कृषि भूमि की खरीद और कृषि भूमि का ट्रांसफर आसान बनाने के बाद डोमिसाइल का टोकनिज्म दूर कर दिया गया है। जम्मू कश्मीर अब बिक्री के लिए है और गरीब व छोटे मालिकों को नुकसान होगा।’
वहीं पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती ने भी एक के बाद एक दो ट्वीट करते हुए विरोध जताया है। महबूबा ने कहा 'लोगों को रोटी और रोजगार देने के सभी मोर्चे पर विफल रहने के बाद भाजपा भोले मतदाताओं को खुश करने के लिए ऐसे कानून बना रही है। इस तरह के कठोर कदमों के खिलाफ जम्मू-कश्मीर के सभी तीन प्रांतों के लोगों को एकजुटता से लड़ने की ज़रूरत हैं।'
इसके अलावा सीपीएम नेता सीताराम येचुरी ने भी ट्वीट विरोध जताया। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा 'यह हाईवे डकैती है। जम्मू कश्मीर के संसाधनों और सुंदर भू-भाग की डकैती है।’