राजनीति

पीएम मोदी 21 साल में बने बोगीबील पुल कल करेंगे राष्‍ट्र को समर्पित, जानिए सेना के लिए क्‍यों है खास?

ब्रह्मपुत्र नदी की चौड़ाई 10.3 किलीमीटर से कमकर इस पर करीब पांच किलोमीटर लंबा रेल-रोड ब्रिज बनाया गया है। यह भारत का सबसे लंबा रेल पुल है।
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rail-road bridge
पीएम मोदी 21 साल में बने बोगीबील पुल कल करेंगे राष्‍ट्र को समर्पित, जानिए सेना के लिए क्‍यों है खास?

नई दिल्‍ली। असम में ऊपरी ब्रह्मपुत्र नदी पर 21 साल में बनकर तैयार हुआ बोगीबील पुल को मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्‍ट्र को समर्पित करेंगे। यह पुल भारतीय सेना के लिए काफी महत्वपूर्ण है। करीब पांच किलोमीटर लंबा यह पुल रेल-रोड ब्रिज भारत को अब नई ताकत देगा। खासकर अरुणाचल सीमा से सटे होने के कारण सामरिक दृष्टि से यह काफी महत्वपूर्ण है। इस पुल के शुरू होने से भारतीय सेना को जवानों के परिवहन में मदद मिलेगी। बता दें कि भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य और चीन करीब 4,000 किलोमीटर लंबा बॉर्डर साझा करते हैं। इसका करीब 75 प्रतिशत हिस्सा सिर्फ अरुणाचल प्रदेश में है। ऐसे में चीन के तनातनी की स्थिति में भारतीय सेना के लिए यह पुल निर्णायक साबित हो सकता है।

2002 में नेशनल प्रोजेक्‍ट घोषित
भारतीय रेल के इस पुल की आधारशिला साल 2002 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने रखी थी । 2007 में इसे नेशनल प्रोजेक्ट घोषित किया गया लेकिन पिछले चार-पांच से इसके निर्माण में तेजी आई। इस पुल के चालू लाने से असम के डिब्रूगढ़ जिले में ब्रह्मपुत्र के उत्तर की तरफ जाना आसान हो जाएगा। यह पुल अरुणाचल प्रदेश के लिहाज से भी बहुत महत्‍वपूर्ण है। अरुणाचल प्रदेश और पूरे उत्तर पूर्वी भारत की सीमा चीन से लगा होने के कारण यह क्षेत्र न केवल भौगोलिक दृष्टि से अहम है बल्कि सामरिक दृष्टि से भी भारत के लिए इसकी महत्ता काफी है। इन चुनौतियों से पार पाने की दिशा में बोगीबील ब्रिज इस इलाके में रेल लाइन के विकास की नई शुरुआत है जो आगामी वर्षों में इस क्षेत्र के लिए वरदान साबित हो सकती है।

भारत का सबसे लंबा रेल-रोड ब्रिज
बोगीबील पुल करीब पांच किलोमीटर लंबा रेल-रोड ब्रिज है। यह भारत का सबसे लंबा रेल-रोड ब्रिज है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि फिलहाल यहां से 450 किलीमीटर दूर गुवाहाटी में ही ब्रह्मपुत्र को पार करने के लिए नदी पर पुल मौजूद है। जबकि सड़क पुल भी यहां से करीब 250 किलोमीटर दूर है। ऐसे भी आम लोगों की सुविधा के अलावा फौजी जरूरतों के लिहाज से यह पुल सेना को बड़ी ताकत देगा। इस ब्रिज को बनाने में इंजीनियरों को कई तरह की चुनौतियों का भी सामना करना पड़ा है. सबसे पहले तो उन्हें यहां मार्च से लेकर अक्टूबर तक होने वाली बारिश के बाद ही काम करने का समय मिला है. इसके अलावा नदी के पानी के भारी दबाव में होने के नाते किसी भी तरफ से मिट्टी का कटाव शुरू हो जाता है और कहीं भी टापू बन जाता है ऐसे में काम करना या फिर लोकेशन बदलना बहुत मुश्किल हो जाता है लेकिन इन सबसे पार पाते हुए पहली बार रेलवे ने स्टील गर्डर का इस्तेमाल कर इतना बड़ा पुल बनाया है।

3 घंटे कम समय में पूरा होगा दिल्‍ली-डिब्रूगढ़ का सफर
मुख्य अभियंता मोहिंदर सिंह ने बताया कि ब्रह्मपुत्र नदी पर बना 4.9 किलोमीटर लंबा पुल देश का पहला पूर्णरूप से जुड़ा पुल है। उन्होंने बताया कि पूरी तरह से जुड़े पुल का रखरखाव काफी सस्ता होता है। इस पुल के निर्माण में 5,900 करोड़ रुपए का खर्च आया है। इसकी मियाद 120 वर्ष है। इससे असम से अरुणाचल प्रदेश के बीच की यात्रा दूरी घट कर चार घंटे रह जाएगी। इसके अलावा दिल्ली से डिब्रूगढ़ रेल यात्रा समय तीन घंटे घटकर 34 घंटे रह जाएगा। इससे पहले यह दूरी 37 घंटे में तय होती थी।

Updated on:
24 Dec 2018 09:03 am
Published on:
24 Dec 2018 07:48 am