
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पर्यावरण के क्षेत्र में ऐतिहासिक काम करने के लिए यूएन की ओर से 'चैंपियंस ऑफ अर्थ'के खिताब से बुधवार को सम्मानित किया गया है। देश की राजधानी दिल्ली में यूएन चीफ एंटोनियो गुटेरेस ने मोदी को यह सम्मान दिया। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि क्लाइमेेट की चिंता जब तक कल्चर से नहीं होगी, इस समस्या को खत्म कर पाना मुश्किल है। हमने प्रकृति को सजीव माना है। पर्यावरण के प्रति भारत की संवेदना को आज विश्व स्वीकार कर रहा है, लेकिन ये हजारों सालों से हमारी जीवन शैली का हिस्सा रहा है। लेकिन, पीएम मोदी ने कभी इस क्लाइमट चेंज को लेकर काफी अलग बयान दिया था।
कोई क्लाइमेट चेंज नहीं होता- मोदी
पीएम मोदी ने साल 2014 में शिक्षक दिवस के मौके पर साफ कहा था कि कोई क्लाइमेट चेंज नहीं होता है। उन्होंने बच्चों द्वारा क्लाइमेट चेंज के ऊपर किए गए सवालों पर जवाब देते हुए कहा कि कोई क्लाइमेट चेंज नहीं हुआ। हम बदल गए हैं। हमारी आदतें बदल गई हैं। हमारी आदतें बिगड़ गई हैं। उन्होंने कहा था कि हमनें अपनी आदतों के कारण क्लाइमेट को बिगाड़ दिया है। उन्होंने साफ कहा था कि हम बदल जाएं, तो पूरी व्यवस्था बदल जाएगी। पीएम ने कहा था कि मनुष्य प्रकृति से संघर्ष न करें, उनसे प्रेम करें। अगर हम बदल गए, तो प्रकृति अपने आप बदल जाएगी।
पीएम मोदी ने कहा, 'क्लाइमेट जस्टिस की बात करता हूं'
वहीं,आज के कार्यक्रम में पीएम मोदी ने कहा कि मैं क्लाइमेट जस्टिस की बात करता हूं। उन्होंने कहा कि क्लाइमेट चेंज की चुनौती से क्लाइमेट जस्टिस सुनिश्चित किए बिना निपटा नहीं जा सका। पीएम ने कहा कि आज भारत दुनिया के उन देशों में है, जहां सबसे तेज गति से शहरीकरण हो रहा है। ऐसे में अपने शहरी जीवन को स्मार्ट और चिरस्थायी बनाने पर भी बल दिया जा रहा है। पीएम ने कहा कि आज हमारे देश में गरीबों की संख्या घट रही है। गरीबी रेखा से लोग ऊपर उठ रहे हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि आबादी को पर्यावरण पर, प्रकृति पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना विकास के अवसरों से जोड़ने के लिए सहारे की आवश्यकता है, हाथ थामने की जरूरत है। आपको बता दें कि पीएम मोदी के अलावा यह सम्मान फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैंक्रो को भी दिया गया है।