YouTube पर अमूमन मूवी और म्यूजिक से जुड़े वीडियो टॉप ट्रेंडिंग में होते हैं, लेकिन इस बार 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का लाल किले पर झंडा फहराने, गॉर्ड ऑफ ऑनर के निरीक्षण और भाषण से जुड़े वीडियो टॉप ट्रेंडिंग में शामिल रहे। प्रधानमंत्री मोदी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर ही वीडियो को 3 करोड़ से अधिक लोगों ने देखा।
पत्रिका ब्यूरो
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76 वें स्वाधीनता दिवस पर लाल किले पर झंडा फहराने और भाषण के वीडियो यूट्यूब पर टॉप ट्रेडिंग में रहे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आधिकारिक यूट्यूब चैनल के 2 वीडियो, ट्रेंडिंग में क्रमशः नंबर 1 और 2 पोजीशन पर रहे। यूट्यूब पर प्रधानमंत्री के वीडियो को 24 घंटे के अंदर 3 करोड़ से अधिक दर्शकों ने देखा। इसी तरह इंस्टाग्राम पर भी उनका वीडियो वायरल हुआ। इंस्टाग्राम पर भी 1.6 करोड़ से अधिक लोगों ने प्रधानमंत्री के स्वतंत्रता दिवस के भाषण और अन्य कार्यक्रमों के वीडियो देखे।
यूट्यूब की टॉप ट्रेडिंग लिस्ट में अमूमन फिल्म और म्यूजिक से जुड़े वीडियो जगह बनाते हैं। लेकिन, इस बार हर घर तिरंगा जैसे अभियानों से स्वतंत्रता दिवस को लेकर इस कदर लोगों में दीवानगी रही कि भाषण के वीडियो देखने का भी रिकॉर्ड बन गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाल किले तक पहुंचने और गॉर्ड ऑफ ऑनर के निरीक्षण का वीडियो लगातार यूट्यूब पर टॉप ट्रेंडिंग में रहा। इस वीडियो को 1.9 करोड़ से अधिक लोगों ने देखा। भाषण के अंश के कई वीडियो भी तीन करोड़ से अधिक दर्शकों ने देखा। यह इस साल स्वाधीनता दिवस पर प्रधानमंत्री के भाषण की लोकप्रियता दर्शाता है।
प्रधानमंत्री के भाषण की मुख्य बातें
1-आज जब हम आजादी का अमृत महोत्सव मना रहे हैं तो पिछले 75 साल में देश के लिए जीने मरने वाले, देश की सुरक्षा करने वाले, देश के संकल्पों को पूरा करने वाले सभी लोगों के योगदान का स्मरण करने का अवसर है।
2- 75 साल की हमारी ये यात्रा अनेक उतार-चढ़ाव से भरी हुई है। सुख-दु:ख की छाया मंडराती रही है और इसके बीच भी हमारे देशवासियों ने उपलब्धियां हासिल की हैं, पुरुषार्थ किया है, हार नहीं मानी है, संकल्पों को ओझल नहीं होने दिया है।
3- भारत की विविधता ही भारत की अनमोल शक्ति है। शक्ति का एक अटूट प्रमाण है। दुनिया को पता नहीं था कि भारत के पास एक inherent सामर्थ्य है, एक संस्कार सरिता है, और वो है भारत लोकतंत्र की जननी है, Mother of Democracy है।
4- 2014 में देशवासियों ने मुझे दायित्व दिया। आजादी के बाद जन्मा हुआ मैं पहला व्यक्ति था जिसको लाल किले से देशवासियों को गौरवगान करने का अवसर मिला।
5- महात्मा गांधी का जो सपना था आखिरी इंसान की चिंता करने का, महात्मा गांधी जी की जो आकांक्षा थी अंतिम छोर पर बैठे हुए व्यक्ति को समर्थ बनाने की, मैंने अपने आप को उसके लिए समर्पित किया है।
6- अमृतकाल का पहला प्रभात Aspirational Society की आकांक्षा को पूरा करने का सुनहरा अवसर है। हमारे देश के भीतर कितना बड़ा सामर्थ्य है, एक तिरंगे झंडे ने दिखा दिया है। विश्व के हर कोने में हमारा तिरंगा आन-बान-शान के साथ लहरा रहा है।
7- सरकारों को भी समय के साथ दौड़ना पड़ता है और मुझे विश्वास है चाहे केन्द्र सरकार हो, राज्य सरकार हो, स्थानीय स्वराज्य की संस्थाएं हों, किसी भी प्रकार की शासन व्यवस्था क्यों न हो, हर किसी को इस aspiration society को address करना पड़ेगा, उनकी आकांक्षाओं के लिए हम ज्यादा इंतजार नहीं कर सकते।
8- हमने पिछले दिनों जिस ताकत का अनुभव किया है और वो है भारत में सामूहिक चेतना का पुनर्जागरण। आजादी के इतने संघर्ष में जो अमृत था, वो अब संजोया जा रहा है, संकलित हो रहा है।
9- दुनिया कोरोना के काल खंड में वैक्सिन लेना या न लेना, वैक्सिन काम की है या नहीं है, उस उलझन में जी रही थी। उस समय मेरा गरीब देश ने दो सौ करोड़ डोज का लक्ष्य हासिल करके दुनिया को चौंका देने वाला काम कर दिखाया है।
10- विश्व भारत की तरफ गर्व से देख रहा है। अपेक्षा से देख रहा है। समस्याओं का समाधान भारत की धरती पर दुनिया खोजने लगी है। विश्व का यह बदलाव, विश्व की सोच में यह परिवर्तन 75 साल की हमारी अनुभव यात्रा का परिणाम है।
जब राजनीतिक स्थिरता हो, नीतियों में गतिशीलता हो, निर्णयों में तेजी हो, तो विकास के लिए हर कोई भागीदार बनता है। हम सबका साथ, सबका विकास का मंत्र लेकर चलें थे, लेकिन देखते ही देखते देशवासियों ने सबका विश्वास और सबके प्रयास से उसमें और रंग भर दिए हैं।
11- मुझे लगता है आने वाले 25 साल के लिए हमें पंच प्रण पर अपनी शक्ति केंद्रित करनी होगा। जब मैं पंचप्रण की बात करता हूं तो पहला प्रण है कि अब देश बड़े संकल्प लेकर ही चलेगा। दूसरा प्रण है हमें अपने मन के भीतर, आदतों के भीतर गुलामी का कोई अंश बचने नहीं देना है। तीसरी प्रण, हमें अपनी विरासत पर गर्व होना चाहिए। चौथा प्रण है एकता और एकजुटता। और पांचवां प्रण है नागरिकों का कर्तव्य, जिसमें प्रधानमंत्री भी बाहर नहीं होता, मुख्यमंत्री भी बाहर नहीं होता।
12- महासंकल्प, मेरा देश विकसित देश होगा, developed country होगा, विकास के हरेक पैरामीटर में हम मानवकेंद्री व्यवस्था को विकसित करेंगे, हमारे केंद्र में मानव होगा, हमारे केंद्र के मानव की आशा-आकांक्षाएं होंगी। हम जानते हैं, भारत जब बड़े संकल्प करता है तो करके भी दिखाता है।
13- जब मैंने यहां स्वच्छता की बात कही थी मेरे पहले भाषण में, देश चल पड़ा है, जिससे जहां हो सका, स्वच्छता की ओर आगे बढ़ा और गंदगी के प्रति नफरत एक स्वभाव बनता गया है। हमने जब तय किया था, 10 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेडिंग का लक्ष्य, तो यह सपना बड़ा लगता था। पुराना इतिहास बताता था संभव नहीं है, लेकिन समय से पहले 10 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेडिंग करके देश ने इस सपने को पूरा कर दिया है।
14- ढाई करोड़ लोगों को इतने कम समय में बिजली कनेक्शन पहुंचाना, छोटा काम नहीं था, देश ने करके दिखाया।
क्या हम अपने मानक नहीं बनाएंगे? क्या 130 करोड़ का देश अपने मानकों को पार करने के लिए पुरुषार्थ नहीं कर सकता है। हमें किसी भी हालत में औरों के जैसा दिखने की कोशिश करने की जरूरत नहीं है। हम जैसे हैं वैसे, लेकिन सामर्थ्य के साथ खड़े होंगे, ये हमारा मिजाज होना चाहिए।
15-जिस प्रकार से नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति बनी है, जिस मंथन के साथ बनी है, और भारत की धरती की जमीन से जुड़ी हुई शिक्षा नीति बनी है, रसकस हमारी धरती के मिले हैं। हमने जो कौश्लय पर बल दिया है, ये एक ऐसा सामर्थ्य है, जो हमें गुलामी से मुक्ति की ताकत देगा। हमें हमारे देश की हर भाषा पर गर्व होना चाहिए। हमें भाषा आती हो या न आती हो, लेकिन मेरे देश की भाषा है, मेरे पूर्वजों ने दुनिया को दी हुई ये भाषा है, हमें गर्व होना चाहिए।
16- आज दुनिया holistic health care की चर्चा कर रही है लेकिन जब holistic health care की चर्चा करती है तो उसकी नजर भारत के योग पर जाती है, भारत के आयुर्वेद पर जाती है, भारत के holistic lifestyle पर जाती है। ये हमारी विरासत है जो हम दुनिया का दे रहे हैं। आज विश्व पर्यावरण की समस्या से जो जूझ रहा है। ग्लोबल वार्मिंग की समस्याओं के समाधान का रास्ता हमारे पास है। इसके लिए हमारे पास वो विरासत है, जो हमारे पूर्वजों ने हमें दी है।
17- हमारे family values, विश्व के सामाजिक तनाव की जब चर्चा हो रही है। व्यक्तिगत तनाव की चर्चा होती है, तो लोगों को योग दिखता है। सामूहिक तनाव की बात होती है तब भारत की पारिवारिक व्यवस्था दिखती है।
हम वो लोग हैं, जो जीव में शिव देखते हैं, हम वो लोग हैं, जो नर में नारायण देखते हैं, हम वो लोग हैं, जो नारी को नारायणी कहते हैं, हम वो लोग हैं, जो पौधे में परमात्मा देखते हैं, हम वो लोग हैं, जो नदी को मां मानते हैं, हम वो लोग हैं, जो कंकड़-कंकड़ में शंकर देखते हैं।
18- अगर बेटा-बेटी एकसमान नहीं होंगे तो एकता के मंत्र नहीं गुथ सकते हैं। जेंडर इक्वैलिटी हमारी एकता में पहली शर्त है।
जब हम एकता की बात करते हैं, अगर हमारे यहां एक ही पैरामीटर हो एक ही मानदंड हो, जिस मानदंड को हम कहे इंडिया फर्स्ट मैं जो कुछ भी कर रहा हूँ, जो भी सोच रहा हूँ, जो भी बोल रहा हूँ इंडिया फर्स्ट के अनुकुल है। क्या हम स्वभाव से, संस्कार से, रोजमर्रा की जिंदगी में नारी को अपमानित करने वाली हर बात से मुक्ति का संकल्प ले सकते हैं। नारी का गौरव राष्ट्र के सपने पूरे करने में बहुत बड़ी पूंजी बनने वाला है। यह सामर्थ्य मैं देख रहा हूँ और इसलिए मैं इस बात का आग्रही हूँ।
19- हमें कर्तव्य पर बल देना ही होगा। चाहे पुलिस हो, या पीपुल हो, शासक हो या प्रशासक हो, यह नागरिक कर्तव्य से कोई अछूता नहीं हो सकता। हर कोई अगर नागरिक के कर्तव्यों को निभाएगा तो मुझे विश्वास है कि हम इच्छित लक्ष्य को प्राप्त करने में समय से पहले सिद्धि प्राप्त कर सकते हैं।
20- आत्मनिर्भर भारत, यह हर नागरिक का, हर सरकार का, समाज की हर ईकाई का यह दायित्व बन जाता है। यह आत्मनिर्भर भारत यह सरकारी एजेंडा, सरकारी कार्यक्रम नहीं है। यह समाज का जन आंदोलन है, जिसे हमें आगे बढ़ाना है।
आप देखिए पीएलआई स्कीम, एक लाख करोड़ रुपया, दुनिया के लोग हिन्दुस्तान में अपना नसीब आजमाने आ रहे हैं। टेक्नोलॉजी लेकर के आ रहे हैं। रोजगार के नये अवसर बना रहे हैं। भारत मैन्यूफैक्चिरिंग हब बनता जा रहा है।