राजनीति

महाभियोग: कांग्रेस के आक्रामक रुख से मची खलबली, उपराष्ट्रपति नायडू से आज मिलेंगे पीएम मोदी

उपराष्‍ट्रपति वेंकैया नायडू हैदराबाद में अपना कार्यक्रम बीच में छोड़कर दिल्‍ली लौट आए और महाभियोग के मसले पर कानूनी सलाह लेने का काम शुरू कर दिया है।

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नई दिल्ली। उपराष्ट्रपति एवं राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू कल हैदराबाद में अपना कार्यक्रम बीच में छोड़कर दिल्‍ली लौट आए। यहां आते ही उन्‍होंने कानूनविदों से महाभियोग के मुद्दे पर चर्चा की। कानूनविदों ने बताया है कि प्राथमिक स्‍तर पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग का मसला नहीं बनता है। जानकारी के मुताबित इस मसले पर आज उनसे पीएम मोदी मुलाकात करेंगे। आपको बता दें कि अगर उपराष्‍ट्रपति नायडू कांग्रेस के नोटिस को स्वीकार करते हैं तो कानूनी प्रक्रिया नियमों के अनुसार विपक्ष के आरोपों की जांच के लिए उन्‍हें न्यायविदों की तीन सदस्यों की एक समिति गठित करनी होगी।

कांग्रेस का आत्‍मघाती कदम
दिल्ली पहुंचते ही नायडू ने महाभियोग पर अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल, लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्यप, पूर्व विधि सचिव पीके मल्होत्रा और पूर्व विधायी सचिव संजय सिंह से कानूनी और संवैधानिक मुद्दों पर चर्चा की। उन्‍होंने राज्यसभा सचिवालय के अधिकारियों और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस बी सुदर्शन रेड्‌डी से भी बात की है। रेड्डी ने कांग्रेस के महाभियोग नोटिस को आत्मघाती कदम करार दिया है। उन्‍होंने कहा कि प्रथम दृष्टया चीफ जस्टिस पर किसी कदाचार का आरोप तय करने के लिए साक्ष्य नहीं है। अनियमितता से कदाचार तय नहीं होता। संविधान के विशेषज्ञ सुभाष कश्‍यप ने बताया कि महाभियोग का मकसद न्यायपालिका को परेशान करना है। उन्‍होंने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 124 में सीजेआई को कदाचार सिद्ध होने पर हटाने की बात है। संविधान में महाभियोग का कहीं उल्लेख नहीं है। इसका मकसद न्यायपालिका को परेशान करना है।

नोटिस स्‍वीकार न होने पर कांग्रेस दे सकती है चुनौती
कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि अगर राज्यसभा के चेयरमैन वेंकैया नायडू ने महाभियोग के नोटिस को नामंजूर किया तो फैसले को कोर्ट में चुनौती दी जा सकती है। ऐसे में कांग्रेस ने उनके फैसले के खिलाफ कोर्ट जाने का भी विकल्प खुला रखा है। आपको बता दें कि शुक्रवार को कांग्रेस सहित सात विपक्षी दलों ने राज्यसभा के सभापति नायडू को जस्टिस मिश्रा के खिलाफ कदाचार का आरोप लगाते हुए उन्हें पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए नोटिस दिया था। नायडू अगर इस नोटिस को स्वीकार करते हैं तो प्रक्रिया के नियमों के अनुसार विपक्ष के आरोपों की जांच के लिए न्यायविदों की तीन सदस्यों की एक समिति का गठित करनी होगी। इससे पहले इस बात को रविवार को कांग्रेस की तरफ से चीफ जस्टिस पर न्‍यायिक काम रोक देने का दबाव बनाया गया था। उसके बाद उपराष्‍ट्रपति ने यह कदम उठाया है।

Updated on:
23 Apr 2018 10:57 am
Published on:
23 Apr 2018 06:18 pm
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