असम में एनआरसी मसौदे को लेकर सियासी घमासान जारी है।
नई दिल्ली: असम में एनआरसी मसौदे को लेकर राजनीति थमने का नाम नहीं ले रही है। जहां विपक्ष एक तरफ सरकार पर हमला बोल रहा है। वहीं सत्ता पक्ष लगातार जवाब दे रहा है। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि असम में एनआरसी मसौदे पर विपक्ष राजनीति कर रहा है। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं वह बेवजह देश को गुमराह कर रहा है।
एनआरसी पर गृहमंत्री ने किया ममता को आश्वस्त
गौरतलब है कि एनआरसी मुद्दे पर विपक्षी पार्टियां केंद्र और असम सरकार पर हमला बोल रही है। पिछले दिनों पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राजनाथ सिंह से इस मसले में संशोधन करने के लिए मुलाकात की थी। गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने ममता बनर्जी को आश्वस्त किया कि यह पूरी प्रक्रिया कानून के अनुसार निष्पक्षता के साथ की जा रही है तथा किसी को बेवजह परेशान नहीं किया जाएगा। बनर्जी से मुलाकात के बाद सिंह ने ट्विटर पर लिखा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने एनआरसी के मुद्दे पर उनसे मुलाकात की। हमने उन्हें आवश्वस्त किया कि इस पूरी प्रक्रिया में किसी को भी परेशान नहीं किया जाएगा और हर चरण में सभी को अपनी बात रखने तथा आपत्ति और दावे दायर करने का मौका दिया जाएगा। यह मसौदा रजिस्टर उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कानून के अनुसार बनाया गया है। यह पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष , पारदर्शी और कानून के अनुसार पूरी की जा रही है तथा किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा।
राजनाथ पहले ही कर चुके हैं आश्वस्त
इससे पहले भी राजनाथ सिंह ने कहा था कि कुछ लोग इस मुद्दे पर बेवजह डर का माहौल बना रहे हैं। बता दें कि सोमवार को जारी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के अंतिम मसौदे में 40 लाख नागरिकों के अवैध होने का दावा किया गया है। गृहमंत्री ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह निष्पक्ष बताया है। उन्होंने कहा है कि इस मामले में गलत बातें न फैलाई जाएं। ये तो सिर्फ ड्राफ्ट है ये अंतिम सूची नहीं है। गृह मंत्री राजनाथ सिंह के मुताबिक जिन लोगों के नाम इस अंतिम मसौदे में शामिल नहीं हैं, वे विदेशी ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं। जिनके नाम छूटे हैं, उन पर कोई भी न्यायिक कार्रवाई नहीं की जाएगी। इसे लेकर किसी भी रूप में परेशान होने की जरूरत नहीं है।
क्या ये है पूरा मामला
दरअसल सोमवार को एनआरसी ने अंतिम मसौदा जारी कर दिया है। इसमें कुल 3.29 करोड़ लोगों में से 2.89 करोड़ लोग नागरिकता के योग्य पाए गए हैं। जबकि 40 लाख लोगों के वहां अवैध रूप से रहने का दावा किया जा रहा है। यह आंकड़े एनआरसी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद जारी किए हैं. एनआरसी का कहना है कि यह सिर्फ मसौदा है, इसे अंतिम सूची नहीं माना जाए। एनआरसी के रजिस्ट्रार जनरल शैलेश ने जानकारी दी है कि जिन लोगों का नाम पहले मसौदे में था और अंतिम मसौदे से गायब है, उन्हें एनआरसी की ओर से व्यक्तिगत पत्र भेजा जाएगा। इसके जरिये वह अपना दावा पेश कर सकेंगे। ये 40 लाख लोग वे हैं जो एनआरसी में कागजी वैध दस्तावेज की कार्रवाई पूरी नहीं कर सके, जिसके चलते उन्हें अवैध ठहराया गया है। 40 लाख लोगों में वे भी शामिल हैं, जिनके पास 25 मार्च 1971 से पहले की नागरिकता के कोई भी वैध दस्तावेज नहीं हैं, जिसके चलते एनआरसी ने उन्हें वैध नागरिक नहीं ठहराया।