राजनीति

राजपथ पर परेड देखने के लिए राहुल गांधी को मिलेगी चौथी पंक्ति में जगह, कांग्रेस ने दिया ये जवाब

दरअसल हर बार कांग्रेस अध्यक्ष को पहली पंक्ति में जगह मिलती रही है। लेकिन इस साल चौथी लाइन में जगह दी गई है।
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Updated: 25 Jan 2018, 6:43 PM IST
rahul gandhi, rahul gandhi on pared

नई दिल्ली: मोदी सरकार में पहली बार कांग्रेस अध्यक्ष को गणतंत्र दिवस समारोह में आगे की पंक्ति में जगह नहीं मिली है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को चौथी पंक्ति में बैठने की जगह दी गई है। इसको लेकर दिल्ली में सियासत गरमा गई है। कांग्रेस ने इस मामले को लेकर खासे नाराजगी जताई है।कांग्रेस ने इसको लेकर मोदी सरकार और बीजेपी पर तंज कसा है। कांग्रेस ने सरकार पर ओछी राजनीति करने का आरोप लगाया है।दरअसल हर बार कांग्रेस अध्यक्ष को पहली पंक्ति में जगह मिलती रही है। पिछले कई सालों से सोनिया गांधी को जगह मिलती रही है। हालांकि, राहुल गांधी ने कहा है कि गणतंत्र दिवस परेड अहम होता है इसलिए वे इसमें शामिल होंगे।

बता दें कि हाल ही में गुजरात चुनाव के दौरान राहुल गांधी ने कांग्रेस अध्यक्ष पद संभाला है. हालांकि, कांग्रेस के विरोध पर भाजपा की तरफ से अभी कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

राहुल ने दावोस में पीएम के भाषण पर किया तंज

इससे पहले पिछले दिनों दावोस में पीएम मोदी के भाषण पर राहुल गांधी ने जबरदस्त हमला बोला था। राहुल गांधी ने तंज कसते हुए पीएम से कहा कि जरा देश की समस्‍याओं पर भी आप ध्‍यान दें। देश में गरीब और भुखमरी है, पर आपको उसकी कोई परवाह नहीं है। उन्‍होंने अपने टि्वट में कहा है कि डियर प्रधान मंत्री, स्विटजरलैंड में आपका स्‍वागत है। कृपया बताएं-डावोस, एक फीसद भारतीयों के पास 73 फीसद संपत्ति क्‍यों है? मै सुबूत के तौर पर एक रिपोर्ट टि्वट के साथ अटैच कर रहा हूं। आप कृपया इस पर भी ध्‍यान दें।

राहुल ने ऑक्‍सफैम रिपोर्ट का दिया हवाला

कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने वर्ष 2017 में जारी ऑक्‍सफैम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश के गरीब 67 करोड़ भारतीयों के संपत्ति में केवल एक फीसद का इजाफा हुआ है। जबकि कुल आबादी क में उनकी भागीदारी आधे से अधिक है। इस रिपोर्ट को दुनिया के प्रसिद्ध अर्थशास्‍त्री लुकास चांसल और थॉमस पेक्‍टेटी की देखरेख में तैयार कराया गया था। इस रिपोर्ट में बताया गया है कि उदारीकरण का लाभ अमीरों ने उठाया है। इससे असमानता को तेजी से बढ़ावा मिला है। जबकि देश का आम नागरिक संघर्ष करने को मजबूर है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 1922 के बाद 2014 में भारत में असमानता दर सबसे ज्‍यादा थी।

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