
नई दिल्ली। बिहार में सितंबर-अक्टूबर में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मी अभी से तेज हो गई है। राजनीतिक दलों के नेता अभी से चुनावी जीत को लेकर तैयारियों में जुट गए हैं। सीएम नीतीश कुमार (ब्ड छपजपेी ज्ञनउंत) के नेतृत्व में बिहार एनडीए एकजुट नजर आ रहा है लेकिन महागठबंधन में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। कल तक सबकुछ ठीक होने का दावा करने वाली राष्ट्रीय लोक समता पार्टी ने भी सख्त रुख अपना लिया है।
आरएलएसपी के प्रधान महासचिव माधव आनंद ने कहा कि कुछ लोग चाहते हैं कि तेजस्वी यादव बिना रुकावट के मुख्यमंत्री बन जाएं। लेकिन जब सभी लोग मिलेंगे तभी मुख्यमंत्री बन पाएंगे। नहीं तो किस्मत के धनी नीतीश कुमार फिर बनेंगे मुख्यमंत्री। माधव आनंद ने कहा कि अगर समन्वय समिति नहीं बनानी है तो आप बोल दीजिए नहीं बनाएंगे, आप लोग अपना रास्ता देखिए। माधव आनंद ने कहा कि हमने अभी भी महागठबंधन की आस नहीं छोड़ी है। उन्होंने कहा कि आरजेडी को अहंकार त्यागना होगा।
दूसरी तरफ कांग्रेस ने भी कहा है कि आरजेडी को समन्वय समिति बनानी चाहिए और आपसी मतभेद को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। कांग्रेस के राज्यसभा सांसद अखिलेश प्रसाद सिंह ने कहा कि इसमें किसी कोई तकलीफ नहीं है कि समन्वय समिति बने, लेकिन इस सवाल का जवाब आरजेडी के नेता देंगे। सभी लोग बीजेपी के ख़िलाफ हैं इसलिए जाएंगे कहां? मिल जुलकर मुद्दों को सुलझाने की कोशिश करेंगे।
वहीं हिन्दुस्तानी आवाम मोर्चा और विकासशील इंसान पार्टी ने भी आरजेडी पर दबाव बढ़ाते हुए दो टूक कहा है कि जितना जल्दी हो सके को-ऑर्डिनेशन कमिटी बनाई जाए वरना ये पार्टियां मार्च के अंत तक अलग रास्ता अख्तियार कर सकती हैं। इसके जवाब में आरजेडी ने दो टूक कह दिया है कि इन पार्टियों का कोई खास महत्व नहीं है। इस बीच कांग्रेस सामंजस्य बनाने की बात कह रही है।