एनआरसी पर बोले त्रिपुरा के CM बिप्लब देब कहा - कुछ लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं
नई दिल्ली। असम के नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन (NRC) को लेकर विपक्ष एकजुट होता नजर आ रहा है। एनआरसी रिपोर्ट को लेकर विपक्ष केंद्र सरकार को घेर रहा है। संसद में तो हंगामा हुआ ही है, वहीं संसद परिसर में भी एनआरसी को लेकर प्रदर्शन हुआ है। पक्ष-विपक्ष एक दसूरे पर लगातार हमले बोल रहे हैं। असम में 40 लाख अवैध नागरिक बताने वाली एनआरसी पर त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब ने कहा है कि कुछ लोग माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
Patrika .com/political-news/some-mps-stage-protest-in-front-of-gandhi-statue-over-nrc-assam-issue-1-3183531/?utm_source=PatrikaFacebook&utm_medium=Social">असम एनआरसी पर सियासी घमासान, कई दलों के सांसदो ने किया विरोध प्रदर्शन
'त्रिपुरा में नहीं होगा एनआरसी'
सीएम देब ने कहा है कि, " त्रिपुरा में एनआरसी की कोई मांग नहीं है। त्रिपुरा में सबकुछ व्यवस्थित है।साथ ही उन्होंने कहा है कि ये असम के लिए मुद्दा नहीं है। सीएम के मुताबिक, "मुझे लगता है कि यह असम के लिए भी एक बड़ा मुद्दा नहीं है, सरबानंद सोनोवाल जी इसे प्रबंधित करने में सक्षम है। कुछ लोग आतंक पैदा करने और माहौल खराब करने की कोशिश कर रहे हैं।"
'सरकार बनी तो बंगाल में भी लाएंगे NRC'
बंगाल भाजपा के अध्यक्ष दिलीप घोष ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी की सरकार आती है तो असम की तरह ही बंगाल में भी राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कुछ नेता एनआरसी को लेकर घड़ियाली आंसू बहा रहे हैं क्योंकि उन्हें अपनी वोट बैंक की राजनीति के खत्म होने का अंदेशा है। उन्होंने कहा कि इस बात की चिंता अब सबसे ज्यादा ममता बनर्जी को है। ऐसा इसलिए कि वो मुस्लिमपरस्त राजनीति करती हैं और प्रदेश में सांप्रदायिकता को बढ़ावा देने में लगी है। उनके राज में हिंदुओं को डराने का किया जाता है।
40 लाख अवैध नागरिक
आपको बता दें कि असम में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का अंतिम मसौदा सोमवार को जारी कर दिया गया। ऐसा करने वाला असम देश का पहला राज्य बन गया है। एनआरसी में असम के 3.29 करोड़ आवेदकों में से 2.89 करोड़ लोगों के नाम हैं। 40 लाख लोगों को अवैध करार दिया गया है। अब वो भारतीय नागरिक नहीं रहे।