
हैदराबाद: एनडीए से अलग हुए तेलुगू देशम दल के मुखिया और आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने मोदी सरकार के खिलाफ बड़ा ऐलान किया है। चंद्रबाबू नायडू ने संसद में मोदी सरकार के विरुद्ध अविश्वास प्रस्ताव लाने की घोषणा की है। अविश्वास प्रस्ताव के लिए चंद्रबाबू नायडू ने विपक्षी दलों से समर्थन मांगा है। उन्होंने पत्र लिखकर सभी दलों से समर्थन मांगा है। नायडू ने एनडीए के खिलाफ समर्थन की अपील की है। ऐसे में 18 जुलाई से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के हंगामेदार रहने की संभावना बढ़ गई है।
पार्टी ने विपक्ष से मांगा समर्थन
तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) ने सांसदों को इसके लिए पर्याप्त समर्थन जुटाने का निर्देश दिया गया है। बजट सत्र में ये प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया गया था। विजयवाड़ा में चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में हुई टीडीपी संसदीय दल की बैठक में ये फैसला लिया गया है। टीडीपी नेताओं का आरोप है कि मोदी सरकार ने आंध प्रदेश के बंटवारे के दौरान जो वादे किए वो पिछले चार साल में पूरे नहीं किए गए हैं। लिहाजा मानसून सत्र में टीडीपी दूसरे विपक्षी दलों के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ मुहिम चलाएगी। फिलहाल अविश्वास प्रस्ताव पर कांग्रेस संसदीय दल को तय करना है कि इस मुद्दे पर समर्थन करना है या नहीं । वहीं एनसीपी और लेफ्ट ने कहा कि प्रमुख विपक्षी दलों में अगर सहमति बनती है तो वे अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन करेंगे।
एनडीए से अलग हो चुकी है टीडीपी
गौरतलब है कि विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिलने और राज्य के वादे को पूरा नहीं करने को लेकर टीडीपी ने एनडीए से अपना नाता तोड़ लिया था। चंद्रबाबू नायडू का आरोप है कि पीएम ने 2014 चुनाव के दौरान विशेष राज्य का दर्जा देने का वादा किया था लेकिन उसे पूरा नहीं किया गया। जिसके बाद पार्टी ने अलग होने का फैसला किया। एनडीए से अलग होने के बाद नायडू लगातार मोदी सरकार पर हमला बोल रहे हैं।