झारखंड में तीन विपक्षी दलों ने भाजपा को मात देने के लिए आपसी मतभेदों को भुलाकर नई पार्टी का गठन किया है।
जमशेदपुर। आगामी आम चुनाव को होने में अब बस कुछ ही महीने बचे हैं और उससे पहले मोदी सरकार को रोकने के लिए विपक्ष की ओर से महागठबंधन बनाने की कवायद शुरु हो गई है। अलग-अलग राज्यों में विपक्षी दल अपनी-अपनी रणनीति बना रहे हैं। हालांकि अभी तक महागठबंधन का स्वरुप तो सामने नहीं आया है लेकिन उससे पहले तीसरे मोर्चे का स्वरुप देश के सामने आ गया है। दरअसल झारखंड में तीन विपक्षी दलों ने भाजपा को मात देने के लिए आपसी मतभेदों को भुलाकर नई पार्टी का गठन किया है। तीनों दलों ने अपनी पार्टी को विलय करते हुए नई पार्टी को बनाया है। इस पार्टी को तीसरा मोर्चा कहा जा रहा है। इस नई पार्टी का नाम जनमत रखा गया है। नई पार्टी जनमत ने घोषणा की है कि झारखंड की सभी 14 लोकसभा और 81 विधानसभा सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारेगी।
महागठबंधन को बताया देश के लिए खतरा
आपको बता दें कि झारखंड पीपुल्स पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा-उलगुलान और बहुजन मुक्ति पार्टी का आपस में विलय हुआ है। इसकी घोषणा एक संवाददाता सम्मेलन में झारखंड पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष व पूर्व विधायक सूर्य सिंह बेसरा, झारखंड मुक्ति मोर्चा-उलगुलान के अध्यक्ष व पूर्व सांसद कृष्णा मार्डी और बहुजन मुक्ति पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शकील अहमद ने एक साथ इसकी घोषणा की। जनमता का कहना है कि तीसरा मोर्चा राज्य के मतदाताओं के सामने एक बेहतर विकल्प होगा। पार्टी का कहना है कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अतिपिछड़ा और अल्पसंख्यक उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी जाएगी। सीएम का चेहरा कौन होगा इस सवाल के जवाब में कहा कि इसका निर्णय चुनाव परिणाम के बाद किया जाएगा लेकिन इतना तय है कि कोई आदिवासी चेहरा ही मुख्यमंत्री बनेगा। इधर महागठबंधन को लेकर तंज कसते हुए कहा कि इसमेेें सभी दागी नेताओं की भरमार है और ऐसी पार्टियां अपने-आप को बचाने के लिए एकसाथ आना चाहती है। जनमत के नेताओं ने कहा कि यदि महागठबंधन सफल हो गया तो देश की आंतरिक सुरक्षा और राजनैतिक भविष्य के लिए खतरा होगा।