
एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस और सुनेत्रा पवार (Photo: IANS)
महाराष्ट्र विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है। 17 रिक्त सीटों के लिए हो रहे चुनाव में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने मतदान से पहले ही बड़ी बढ़त हासिल कर ली है। छह सीटों पर महायुति के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं, जिससे विपक्षी महाविकास आघाड़ी (MVA) को बड़ा झटका लगा है।
विधान परिषद की जिन 17 सीटों पर चुनाव होना है, उनमें से ठाणे, रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग, यवतमाल, चंद्रपुर-वर्धा-गढ़चिरौली, पुणे और अहिल्यानगर सीटों पर चुनाव निर्विरोध हो गया है। इन सीटों पर विपक्षी उम्मीदवारों के नाम वापस लेने के बाद महायुति के प्रत्याशी बिना मतदान के ही विजयी हो गए हैं।
निर्विरोध जीत हासिल करने वाले उम्मीदवारों में भाजपा के दो, शिवसेना (शिंदे गुट) के दो और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (सुनेत्रा पवार गुट) के दो उम्मीदवार शामिल हैं। जिसमें ठाणे से रवींद्र फाटक (शिवसेना), यवतमाल से दुष्यंत चतुर्वेदी (शिवसेना), रायगढ़-रत्नागिरी-सिंधुदुर्ग से अनिकेत तटकरे (एनसीपी), पुणे से विक्रम काकड़े (एनसीपी), चंद्रपुर-वर्धा-गढ़चिरौली से अरुण लाखानी (भाजपा) और अहिल्यानगर से प्राजक्त तनपुरे (भाजपा) जीतीं हैं।
अब सभी की नजर 18 जून पर टिकी है, जब शेष 11 सीटों के लिए मतदान होगा। राज्य में रिक्त हो रही 17 सीटों में पहले भाजपा के सात, शिवसेना (अविभाजित) के पांच, एनसीपी (अविभाजित) के तीन और कांग्रेस के दो सदस्य थे।
संख्या बल के लिहाज से महायुति मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है, लेकिन नासिक और जलगांव सीटों पर गठबंधन के भीतर ही असंतोष और बगावत की स्थिति ने राजनीतिक समीकरणों को दिलचस्प बना दिया है।
महाविकास आघाड़ी (एमवीए) गठबंधन में शिवसेना (उद्धव ठाकरे), कांग्रेस और एनसीपी (शरद पवार) शामिल हैं। एमवीए के 15 उम्मीदवारों में से छह ने अपने नामांकन वापस ले लिए, जिसके चलते कई सीटों पर मुकाबला खत्म हो गया और महायुति उम्मीदवारों की राह आसान हो गई।
निर्विरोध चुनाव के बाद विपक्ष ने सत्ताधारी गठबंधन पर धनबल के इस्तेमाल का आरोप लगाया है। शिवसेना (उद्धव ठाकरे) के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत ने विधान परिषद चुनाव प्रक्रिया को ‘मनी मार्केट’ करार देते हुए गंभीर आरोप लगाए। राउत ने ‘एक्स’ पर लिखा, कल पूरा दिन उम्मीदवारों को नाम वापस लेने के लिए मनाने और बिनविरोध चुनाव कराने की कवायद चली। इसके लिए एक ही दिन में करीब 150 करोड़ रुपये खर्च किए गए। विपक्ष के कई उम्मीदवार खुद बाजार में जाकर अपनी कीमत तय करके आए। महाराष्ट्र में इस तरह की राजनीति के लिए बेहिसाब पैसा उपलब्ध है। यह लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक स्थिति है।
महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने भी भाजपा नीत महायुति गठबंधन पर कटाक्ष करते हुए कहा कि चुनाव में धनबल का खुलकर इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने इसे ‘पैसा फेंक, तमाशा देख’ वाली राजनीति बताया।
हालांकि, विपक्ष के आरोपों के बावजूद एमएलसी के चुनावी गणित में महायुति मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। छह सीटों पर निर्विरोध जीत ने भाजपा, शिवसेना (शिंदे) और सुनेत्रा पवार की एनसीपी का मनोबल बढ़ाया है। वहीं, महाविकास आघाड़ी को अब बाकि 11 सीटों पर 18 जून को होने वाले मतदान में अपनी राजनीतिक ताकत साबित करने की चुनौती का सामना करना पड़ेगा।
Updated on:
05 Jun 2026 11:01 am
Published on:
05 Jun 2026 10:56 am
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