रामलीला मैदान में जनता के लिए लगाई गई 45 हजार कुर्सियां बीजेपी के सातों सांसदों को आमंत्रित किया रामलीला मैदान में नहीं बनाई वीआईपी गैलरी
नई दिल्ली। रामलीला ग्राउंड अरविंद केजरीवाल ( Arvind Kejriwal ) की शपथ के लिए सजकर तैयार है। मैदान में करीब 45 हजार कुर्सियां लगाई गई हैं और भी कई तरह के इंतजाम मैदान में किए गए हैं। खुद अरविंद केजरीवाल ऑडियो और वीडियो के जरिए दिल्लीवालों से अपील कर रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा लोग उनके शपथ समारोह में पहुंचे। अरविंद केजरीवाल एक बार फिर उसी ऐतिहासिक रामलीला मैदान ( Ramleela Madan ) में शपथ लेने के लिए तैयार हैं। जहां पर पहले दो बार वो मुख्यमंत्री पद की शपथ ले चुके हैं।
शपथ ग्रहण ( Oath Ceremony ) समारोह की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। अब इंतजार है उस पल का जब अरविंद केजरीवाल तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगें। आप प्रमुख केजरीवाल ने शपथ समारोह का गवाह बनने लिए दिल्ली की जनता ने रामलीला मैदान पहुंचने की अपील की है।
केजरीवाल 16 फरवरी को दोपहर सवा 12 बजे रामलीला मैदान में शपथ लेंगे। अरविंद केजरीवाल के साथ उनके 6 विधायक भी मंत्री पद की शपथ लेगें। ये वही नेता हैं जो अरविंद केजरीवाल की पिछली सरकार में भी मंत्री रहे हैं। रामलीला मैदान में अरविंद केजरीवाल के साथ मनीष सिसोदिया, सत्येंद्र जैन, गोपाल राय, कैलाश गहलोत, इमरान हुसैन और राजेंद्र गौतम मंत्री पद की शपथ लेंगे।
मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में पीएम मोदी, दिल्ली के सातों सांसदों, नवनिर्वाचित बीजेपी विधायकों और सभी नगर निगम पार्षदों को भी आमंत्रित किया गया है। हालांकि पीएम मोदी रविवार को वाराणसी में कई परियोजनाओं का उद्घाटन करने वाले हैं।
बता दें कि विधानसभा चुनाव में दिल्ली की जनता ने तीसरी बार केजरीवाल में भरोसा जताया है। चुनाव में अपने वोट से दिल्लीवालों ने बता दिया है कि उनका भरोसा आम आदमी पार्टी पर ही है। 2013 और 2015 की तरह अरविंद केजरीवाल तीसरी बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने जा रहे हैं। इसीलिए दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान को सजा-संवार कर सुंदर बनाया गया है। सभी कुर्सियां किसी वीआईपी गेस्ट के लिए नहीं बल्कि दिल्ली की उस जनता के लिए लगाई गई हैं जिसने दिल्ली के सिंहासन पर आम आदमी पार्टी को एक बार फिर बैठा दिया है।
अरविंद केजरीवाल का इस रामलीला ग्राउंड से बहुत पुराना नाता है। ये वही रामलीला मैदान है, जहां से अरविंद केजरीवाल इतने बड़े राजनीतिक चेहरा बने। यहीं से उन्होंने राजनीति की पाठशाला में एंट्री ली थी और यहीं से दिल्ली का सिंहासन हासिल किया था। साल 2013 में भ्रष्टाचार के विरुद्ध अन्ना आंदोलन के मुख्य कर्णधारों में अरविंद केजरीवाल भी थे। आंदोलन चला, आंदोलन खत्म हुआ, अन्ना वापस रालेगण सिद्धि लौट गए, मगर अरविंद डटे रहे।