-लाल परिवार की साख दांव पर -तेजस्वी और तेज प्रताप दोनों इसी जिले की अलग अलग सीटों पर उम्मीदवार -परिवारवाद व बगावत
शादाब अहमद
वैशाली (बिहार)। वैशाली, जहां कभी गणतंत्र की पहली ‘सांस’ ली गई थी, आज वही जमीन राजनीतिक वंशवाद बेल की सबसे बड़ी प्रयोगशाला बन गई है। यह विडंबना ही है कि यहां अब लोकतंत्र का सबसे बड़ा विरोधाभास पनप रहा है। एक ऐसा लोकतंत्र, जो नाम और वंश पर निर्भर हो गया है। यहां की अधिकांश विधानसभा सीट पर खड़े हुए उम्मीदवार किसी न किसी नेता के रिश्तेदार है। यही वजह है कि वैशाली जिले की आठों सीटों पर सभी की निगाह जमी हुई है।
पटना से हाजीपुर होते हुए वैशाली जाते समय छठ के माहौल में लोगों को डुबकी लगाते हुए देखा। जगह-जगह छठ मैया के साथ विभिन्न देवी-देविताओं की झांकियां सजी दिखी। इस बीच जधुआ में चाय की दुकान पर चुनाव की चर्चा शुरू करते ही लोगों ने अपने-अपने हिसाब से समीकरण बताने शुरू कर दिए। रामप्रसाद यादव कहने लगे, ‘नीतीश चाचा की अब उम्र हो चली है। इसलिए बदलाव करना जरूरी है।’ इस बात को काटते हुए नंद किशोर मिश्रा ने मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा, ‘कांग्रेस-राजद को सिर्फ मोदी को गालियां देना आता है। एक भी ढंग का काम नहीं करते हैं।’ बहस बढ़ती देख मैं यहां से लालगंज की ओर बढ़ गया।
लालू परिवार के गढ़ राघोपुर के लिए नीतीश सरकार ने कच्ची दरगाह-बिदुपुर से गंगा नदी पर 6-लेन पुल बनाया है। हालांकि इस चमचमाती सड़क से उतरते ही विकास की स्याह तस्वीर सामने आ जाती है। गंगा नदी किनारे बसे राघोपुर समेत अन्य गांवों की बदहाल सड़कें, झोपड़नुमा घर, गांव से दूर स्कूलों में पढ़ने जाते बच्चे इस इलाके की सच्चाई खुद ब खुद बयां करने लगते हैं। वहीं राघोपुर के अरविंद यादव कहते हैं कि उपमुख्यमंत्री रहते हुए तेजस्वी यादव ने इस पुल को मंजूर करवाया था। उनका कहना है यही से चुनाव जीतकर लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी मुख्यमंत्री बने थे। अब सीएम बनने की बारी तेजस्वी यादव की है। गौरतलब है कि इस सीट से लालू परिवार की प्रतिष्ठा दांव पर है। भाजपा ने इस बार भी पूर्व विधायक सतीश कुमार को उïम्मीदवार बनाया है। सतीश ने 2010 में राबड़ी देवी को चुनाव हराया था।
राघोपुर में घास के मकान
लालू के बड़े बेटे तेज प्रताप ने परिवार से बगावत कर अलग राह चुन ली है। राघोपुरा के समीप की महुआ सीट से तेज प्रताप खुद के जनशक्ति जनता दल से चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं उनके सामने राजद के मौजूदा विधायक डॉ. मुकेश रौशन और लोजपा (रामविलास) के संजय सिंह है। तेज प्रताप के खास अंदाज और उनकी बगावत के चलते यह सीट भी खासी चर्चा में बनी हुई है।
डीएम और मंत्री के हत्या के आरोपी रहे बाहुबली पूर्व विधायक विजय कुमार मुन्ना शुक्ला की बेटी शिवानी शुक्ला राजद के टिकट पर मैदान में उतरी है। शिवानी लंदन से कानून की पढ़ाई कर लौटी है। अब मौजूदा भाजपा विधायक संजय कुमार सिंह से यह मुकाबला काफी रोचक दिख रहा है। लालगंज के बबलू शुक्ला ने कहा कि शिवानी ने एलएलएम किया है। प्रचार में वे मसल-पावर पर आधारित राजनीति से हटकर शिक्षा, विकास की बात कह रही है। गौरतलब है कि मुन्ना शुक्ला अलग अलग पार्टियों से तीन बार और उनकी पत्नी अन्नू शुक्ला एक बार चुनाव जीत चुकी है। हालांकि मुन्ना पिछले तीन चुनाव लगातार हारे हैं। फिलहाल मुन्ना जेल में बंद है।
वैशाली विधानसभा सीट पर चुनाव बड़ा दिलचस्प है। जहां मौजूदा विधायक और जेडीयू के उम्मीदवार सिद्धार्थ पटेल के सामने छह बार विधायक रह चुके उनके चाचा पूर्व मंत्री वृषिण पटेल निर्दलीय के रूप में मैदान में हैं। इसी तरह कांग्रेस और राजद भी यहां आमने-सामने हैं। कांग्रेस के संजीव सिंह और राजद ने अजय कुशवाहा को चुनाव में उतारा है। वैशाली में चुनाव बहुकोणीय दिखाई दे रहा है।
पूर्व मुख्यमंत्री रामसुंदर दास की रिश्तेदार कांग्रेस विधायक प्रतिमा कुमारी की राह में महागठबंधन के ही घटक दल सीपीआइ के मोहित पासवान आ गए हैं। ऐसे में महागठबंधन की एकता यहां टूट गई। जेडीयू ने महेंद्र राम को अपना उम्मीदवार बनाया है।