
- विभिन्न संगठनों ने किया सम्मान
प्रतापगढ़. शहर में जैन श्राविका ने 131 दिन तक तपस्या कर उपवास कर अपना नाम गोल्डन बुक ऑफ रिकॉड्र्स में दर्ज किया। प्रतापगढ़ में चिपड़ परिवार की बहू मोनिका ने 4 माह और 11 दिनों तक कुछ नहीं खाया। वे सूर्योदय के बाद और सूर्यास्त से पहले गर्म पानी पर आश्रित रही। इस तरह की तपस्या पूरी सोमवार को एक जैन श्राविका न की। इस रिकॉर्ड तपस्या के लिए उनका नाम गोल्डन बुक ऑफ रिकॉड्र्स में दर्ज किया गया है। इसके पहले यह कीर्तिमान रतलाम की निर्मला नाहर के नाम था। जिन्होंने 125 उपवास की तपस्या की थी ।
विभिन्न सामाजिक संगठनों और धार्मिक संगठनों की ओर से सोमवार को तपस्वी 32 वर्षीय मोनिका का अभिनंदन किया गया। साधुमार्गी जैन श्रावक संघ की ओर से आयोजित किए गए कार्यक्रम में बड़ी संख्या में रतलाम, नीमच, मंदसौर, दिल्ली, मुंबई, जयपुर आदि स्थानों से आए जैन धर्मावलंबियों ने भाग लिया। तप अभिनंदन समारोह के कार्यक्रम में अतिरिक्त जिला कलक्टर हेमेंद्र नागर, नगर परिषद सभापति कमलेश डोसी सहित कई जैन संघों के प्रतिनिधि मौजूद थे। अतिरिक्त जिला कलक्टर हेमेंद्र नागर ने इस मौके पर कहा कि सामान्य व्यक्ति के लिए एक दिन भी भूखा रहकर तप करना मुश्किल होता है। 131 तक की संख्या गिनना भी भारी लगता है ऐसे में मोनिका की ओर से इस प्रकार के तप की आराधना करना वास्तव में तपस्या की पराकाष्ठा है। गौरतलब है कि जैन धर्म में तपस्या का विशेष महत्व है 10, 20, 30 दिनों की उपवास की तपस्या कई श्रद्धालु करते रहते हैं। लेकिन इतनी लंबी तपस्या अपने आप में एक कीर्तिमान है।
आस्था का प्रभाव
इस मौके पर मौजूद गोल्डन बुक ऑफ रिकॉड्र्स के प्रतिनिधि मनोज शुक्ला ने कंपनी की ओर से प्रमाण पत्र दिया। उन्होंने कहा कि मेडिकल साइंस के मुताबिक इस तरह निराहार रहकर तपस्या करना शरीर को काफी कमजोर करता है। लेकिन इसे आस्था और धर्म का प्रभाव ही कहा जा सकता है कि इतने दिन भूखे रहकर भी स्वस्थ रहता है।