- अधिकांश कॉलोनियों में पानी का दबाव कम हुआ- होने लगा जल संकट
केस एक....किला परिसर: दस मिनट में एक बाल्टी भी नहीं भरती
शहर के किला परिसर स्थित बाणेश्वरी कॉलोनी में दस दिन पहले तक पानी का इतना प्रेशर आता था कि घरों में बने भूमिगत टैंक भरने के बाद नलों के वॉल्व बंद करने पड़ते थे। लेकिन कुछ दिन पहले ही यहां सीवरेज लाइन डालने के लिए खुदाई का काम शुरू हुआ। इसके बाद कुछ दिन तो पानी की लाइन जोड़ी ही नहीं, कई शिकायतों के बाद लाइन जुड़ी लेकिन पानी का प्रेशर नहीं आ रहा। हालत यह है कि अब एक बाल्टी भरने में भी दस मिनट लग जाते हैं।
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केस दो... हाउसिंग बोर्ड: पानी की धार हो गई पतली
हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में भी सीवरेज लाइन डालने के बाद पेयजलापूर्ति की व्यवस्था गड़बड़ा गई। पहले इस इलाके में सुबह प्रेशर से नल आते थे। स्थानीय निवासियों का कहना था कि सीवरेज लाइन डलने के बाद नलों में पानी का दबाव कम हो गया। सीवरेज लाइन से पेयजल लाइन गड़बड़ा गई। खुदाई के बाद टूटी लाइनों को भी सही ढंग से नहीं जोड़ा जा रहा। इसके चलते लाइनों में रिसाव होता है और पानी का प्रेशर कम होने लगता है। साथ ही पानी गंदा भी आने लगा है।
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प्रतापगढ़. शहर के अंदरूनी इलाकों में चल रहे सीवरेज लाइन के कार्य में दो विभागों में तालमेल नहीं होने का खमियाजा शहरवासियों को भुगतना पड़ रहा है। सीवरेज लाइन के दौरान खुदाई के कारण पाइप लाइन जगह-जगह क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे अंदरूनी शहर में पेयजल आपूर्ति ठप हो गई। पाइप लाइन की खुदाई के बाद कई दिनों तक पानी की टूटी लाइन जोड़ी ही नहीं जा रही, जबकि जहां कहीं यदि ये लाइन जुड़ भी जाती है तो उसका अलाइनमेंट बिगड़ गया, जिससे पानी का प्रेशर खत्म हो गया।
सीवरेज लाइन डालने का काम आरयूआईडीपी(राजस्थान अरबन इंफ्रांस्टक्चर डवलपमेंट प्रोजेक्ट-रूडिप) की देखरेख में किया जा रहा है। शहर में करीब ८0 प्रतिशत भाग में सीवरेज की लाइन बिछा दी गई, लेकिन वहां भी सडक़ें खुदी पड़ी है। इससे सडक़ों पर धूल के गुबार उड़ते रहते हैं। टूटी सडक़ों की मरम्मत का काम काफी धीमी गति से हो रहा है।
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पाइप लाइन तोडी, गर्मी में हाल बेहाल
सीवरेज लाइन डालने में सबसे ज्यादा परेशानी पेयजल आपूर्ति व्यवस्था में हो रही है। लाइन डालने के दौरान की जा रही खुदाई से पानी की मैन लाइन टूट रही है। जिसे न रूडिप जोड रहा और न ही जलदाय विभाग । पीने के पानी की समस्या हो गई। लोग टेंकर मंगाकर काम चला रहे ळें। लेकिन टूटी सडक़ के कारण टैंकर भी नहीं पहुंच पा रहा।
किला परिसर में पद्मावती रिसॉर्ट के पीछे स्थित बाणेश्वर कॉलोनी निवासी नीलेश सेठिया और प्रीतम कुमार ने बताया कि उनके आसपास की कॉलोनियों में पाइप लाइन डालने के बाद पहले तो कई दिन तक लाइन जोड़ी ही नहीं गई, बाद में बड़ी मुश्किल से लाइन जोड़ी लेकिन अब पानी का प्रेशर नहीं आ रहा। सुबह जब नल आता है तो एक बाल्टी भी मुश्किल से भर पाता है। जबकि सीवरेज से पहले इतना पानी आता था कि मैन नल का वाल्व बंद करना पड़ता था। इनका कहना था कि सीवरेज के इंजीनियर पाइप लाइन जोडऩे का काम श्रमिकों के भरोसे छोड़ देते हैं। श्रमिक लाइन को तकनीकी रूप से सही नहीं जोड़ पाते। लाइन का अलाइनमेंट बिगड़ गया। इसके चलते पानी का प्रेशर कम हो गया।
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मौके पर ही हो सुधार
स्थानीय निवासियों का कहना था कि पाइप लाइन जोडऩे के लिए कुशल कर्मचारी की जरूरत है। साथ ही सीवरेज का पाइप डालते समय ही पानी की लाइन भी जोड़ देनी चाहिए। शहर के विकास के लिए सीवरेज लाइन जैसी परियोजनाएं जरूरी है। लेकिन इस कार्य के दौरान आने वाली समस्याओं का निराकरण भी जरूरी है। इसके लिए सभी विभागों का समन्वय होना चाहिए। ताकि कहीं पानी की पाइप लाइन टूटे तो वह तुरंत ठीक हो सके और सडक़ की मरम्मत भी हाथों हाथ ही हो जाए।
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खबर का असर.....
राजस्थान पत्रिका ने गत दिनों ‘एक तो गर्मी का कहर, ऊपर से सीवरेज परियोजना का सितम’ शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। इसके बाद रूडिप की टीम ने शहर में जगह-जगह टूटी पानी की लाइन अभियान चलाकर ठीक की। इसके बाद लोगों ने राहत की सांस ली। इस समाचार में बताया गया था कि शहर की किला परिसर स्थित कॉलोनी में सीवरेज की लाइन डालने के कारण पाइप लाइन क्षतिग्रस्त हो गई, जिसे जोड़ा ही नहीं गया। इसके चलते स्थानीय नागरिक परिशान है। समाचार प्रकाशन के बाद सीवरेज का काम कर रही कंपनी के इंजीनियरों ने मौके पर पहुंच कर पाइपलाइन ठीक की।
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शिकायत आते ही ठीक करते है पाइप लाइन
शहर में सीवरेज लाइन डालने के दौरान पाइप लाइन टूटती ही है। क्षतिग्रस्त पाइप लाइन को शिकायत मिलते ही ठीक करते हैं, ताकि पेयजल आपूर्ति सुचारू हो सके।
- मनीष शर्मा, इंजीनियर, सीवरेज परियोजना