
गौतमेश्वर मेले का आज से आगाज, पत्रिका फोटो
Gautameshwar Temple Rajasthan: अरावली की उपत्यकाओं में स्थित दक्षिणी राजस्थान का प्रमुख तीर्थ गौतमेश्वर महादेव अपनी अनूठी परंपराओं के लिए जाना जाता है। कांठल का हरिद्वार कहलाने वाले इस तीर्थ में खंडित शिवलिंग की वर्षों से पूजा की जा रही है, जबकि धर्म शास्त्रों में खंडित प्रतिमाओं के पूजन को सामान्यत: शुभ नहीं माना जाता।
यहां जीव हत्या के पाप से मुक्ति मिलने की मान्यता प्रचलित है। किसी व्यक्ति से जीव की हत्या हो जाने पर या समाज से अलग किए जाने की स्थिति में पापमोचनी गंगा कुंड में स्नान कराया जाता है। इसके बाद मंदिर का पुजारी की ओर से पूजा-अर्चना और अन्य धार्मिक क्रियाएं कराई जाती है। इसके बाद पापमुक्ति का प्रमाण-पत्र प्रदान करता है। मान्यता है कि सप्त ऋषियों में शामिल गौतम ऋषि का गोहत्या का कलंक भी इसी कुंड में स्नान करने से समाप्त हुआ था।
इतिहास और मंदिर परिसर में लगे प्रस्तर के अनुसार मोहम्मद गजनवी ने यहां आकर शिवलिंग को खंडित करने का प्रयास किया था। किंवदंति है कि प्रहार करते ही शिवलिंग से मधुमक्खियों का झुंड निकला और उसने हमलावरों पर हमला कर दिया, जिससे वे भाग गए। बाद में गजनवी ने यहां शीश नवाया और मंदिर का पुनर्निर्माण करवाया।
मंदिर में पाप मुक्ति प्रमाण-पत्र देने की परंपरा आज भी जारी है। पुजारी घनश्याम शर्मा के अनुसार यह प्रमाण-पत्र अमिनात कचहरी गौतमेश्वर की ओर से जारी किया जाता है। मान्यता है कि मंदिर के ऊपर बने गदा लोट पर लोटने से कई योनियों के बंधन से मुक्ति मिलती है। मान्यता है कि सप्त ऋषियों में शामिल गौतम ऋषि का गोहत्या का कलंक भी इसी कुंड में स्नान करने से समाप्त हुआ था।
यह स्थान श्रृंग ऋषि की तपोस्थली भी माना जाता है। त्रेता युग में उनके तप से यहां गंगा प्रकट हुई थी। पवित्र कुंड में स्नान करने से महर्षि गौतम को पाप से मुक्ति मिली थी। मंदिर परिसर में प्राचीन मठ भी स्थित है, जहां अखंड धूणी जलती है। मठ के सामने एक मंदिर है, जो नागा साधु पदमपुरी की समाधि पर बना हुआ है। पास ही मंगलेश्वर महादेव मंदिर और गोस्वामी आश्रम में भी वर्षों से अखंड धूणी जल रही है।
Updated on:
28 Apr 2026, 9:24 AM IST
Published on:
27 Apr 2026, 1:12 PM IST
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