Crop Damage Compensation: प्रतापगढ़ में छोटी सादड़ी उपखंड क्षेत्र के गांवों में सोयाबीन और मूंगफली की फसल खराब होने के बावजूद किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने से नाराजगी बढ़ती जा रही है। किसानों से करीब एक करोड़ 88 लाख रुपए से ज्यादा बीमा प्रीमियम वसूला गया। लेकिन फिर भी किसानों को मुआवजा अब तक नहीं मिला है।
Crop Damage Compensation: प्रतापगढ़ में छोटी सादड़ी उपखंड क्षेत्र के गांवों में सोयाबीन और मूंगफली की फसल खराबे का किसानों को अब तक मुआवजा नहीं मिलने से नाराजगी बढ़ती जा रही है। किसानों से करीब एक करोड़ 88 लाख रुपए से ज्यादा बीमा प्रीमियम वसूला गया। लेकिन फिर भी किसानों को मुआवजा अब तक नहीं मिला है।
करजू, जलोदा जागीर, मानपुरा जागीर, साठोला, बम्बोरी, चांदोली, गणेशपुरा सहित अन्य ग्राम पंचायतों के करीब 14 हजार से ज्यादा किसान फसल खराबे से प्रभावित हैं।
किसानों का कहना है कि उन्होंने बैंकों से ऋण लेकर फसल बीमा करवाया था, लेकिन बीमा कंपनियों और संबंधित विभाग की लापरवाही के कारण उन्हें अब तक कोई राहत नहीं मिल सकी। किसानों के अनुसार फसल बीमा के नाम पर बैंकों ने एक ही प्रक्रिया में खातों से करोड़ों रुपए की राशि काट ली थी। इसके बावजूद बेमौसम बारिश से सोयाबीन व मूंगफली की फसल पानी में डूबकर खराब हो गई, लेकिन मुआवजा नहीं मिला।
छोटी सादड़ी उपखंड क्षेत्र की विभिन्न ग्राम पंचायतों के कुल 14,086 किसानों ने फसल बीमा करवाया था। इन किसानों से करीब एक करोड़ 88 लाख रुपए का प्रीमियम वसूला गया। किसानों का कहना है कि उन्होंने नियमों के अनुसार फसल खराब होने के चौबीस घंटे के भीतर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करवाई थी।
इसके बाद बीमा कंपनी के प्रतिनिधियों ने खेतों का निरीक्षण कर नुकसान का आकलन भी किया, लेकिन इसके बावजूद भुगतान नहीं किया गया। किसानों का कहना है कि एक ओर वे कर्ज के बोझ तले दबे हैं, वहीं दूसरी ओर फसल खराब होने के बाद भी आर्थिक सहायता नहीं मिलने से उनकी स्थिति और कमजोर हो गई है।
किसानों ने प्रशासन और बीमा कंपनियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब समय पर प्रीमियम वसूला जा सकता है तो नुकसान होने पर भुगतान में देरी क्यों हो रही है। करजू और छोटी सादड़ी क्षेत्र के हजारों किसान अब भी मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।
मामले को लेकर किसानों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द मुआवजा जारी नहीं किया गया तो वे धरना-प्रदर्शन करेंगे। इसके लिए क्षेत्र के किसान संगठनों ने बैठकें शुरू कर दी हैं और आंदोलन की तैयारी की जा रही है।