
प्रतापगढ़।
प्रतापगढ़ जिले के अरनोद कस्बे में सात साल पहले एक महिला अपने किसी सहयोगी के साथ बस स्टैण्ड स्थित फोटो स्टूडियो में आई और वहां मौजूद फोटोग्राफर को झूठे केस में फंसाने की धमकी देकर पचास हजार रुपए की मांग की। फोटोग्राफर झुका नहीं और दोनों के खिलाफ पुलिस में केस कर दिया। अब सुनवाई के बाद अदालत ने महिला और उसके साथी को तीन-तीन साल की सजा सुनाई है।
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्टे्रट अरनोद मुख्यालय प्रतापगढ़ की पीठासीन अधिकारी कुमकुमसिंह ने महिला कोटड़ी निवासी देऊबाई (45)पत्नी उदेराम उर्फ उदयलाल कीर और उसके साथी डोराना खेड़ा निवासी भैरु पुत्र भोगजी मीणा को झूठे केस में फंसाने ( blackmailing case ) की धमकी देने पर तीन-तीन वर्ष की सजा सुनाई है। दोनों पर पांच-पांच हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। प्रकरण के अनुसार अरनोद निवासी फोटोग्राफर कुलदीप पुत्र हीरालाल उपाध्याय ने 3 मई 2012 को अरनोद थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
महिला ने पकड़ लिया फोटोग्राफर का हाथ और करने लगी ऐसा
इसमें बताया था कि वह 30 अप्रेल 2012 को बस स्टैंड स्थित फोटो स्टूडियो पर बैठा था। इस दौरान महिला और उसका साथी दुकान पर आए। महिला का फोटो खींचने के लिए कहा। फोटो खींचने के लिए जैसे ही महिला दुकान के अन्दर आई तो स्टूडियो के अन्दर घुसते ही महिला ने हो-हल्ला मचाना शुरू कर दिया व चिल्लाने लग गई। उसने कुलदीप का हाथ पकड़ लिया और उसकी इज्जत खराब करने लग गई। दोनों ने कुलदीप पर झूठे मामले में फंसाने की धमकी देकर उससे पचास हजार रुपए की मांग की। लेकिन कुलदीप ने इससे इनकार कर दिया। मामले में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर अनुसंधान शुरू किया। पुलिस ने देउबाई व भैरुलाल के विरुद्व न्यायालय के समक्ष चालाना प्रस्तुत किए। न्यायालय ने सुनवाई के बाद दोनों को दोषी मानते हुए तीन-तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई।
फोटो - प्रतीकात्मक