
प्रतापगढ़ कृषि विज्ञान केन्द्र पर सोमवार को महिला किसान दिवस का आयोजन किया गया। इस अवसर पर केन्द्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं प्रभारी डॉ. योगेश कनोजिया ने कहा कि कृषि कार्य में महिलाओं की सर्वाधिक भूमिका रहती हैं। खेती-बाड़ी में लगभग 70 से 8 0 कार्य महिलाओं द्वारा ही किया जाता हैं। महिलाओं को सम्मान देने के लिए ही प्रति वर्ष महिला किसान दिवस का आयोजन किया जाता हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं आज हर क्षेत्र में पुरुषों के बराबर हैं। उन्होंने महिलाओं को कृषि में उन्नत छोटे औजारों के बारें में जानकारी दी। विश्वविद्यालय द्वारा ग्रामिण महिलाओं के लिए निर्धूम चल्हा तैयार किया गया हैं, जिसका उपयोग करने से घर में धुआं नहीं होता हैं। महिलाओं में श्वास संबन्धित शिकायत नहीं आती हैं। उन्होंने महिलाओं को गृह वाटिका के बारें में भी जागरुक किया।
अग्रणी बैंक प्रबन्धक, बैंक ऑफ बड़ौदा श्री अजय नान्दूलकर ने कार्यक्रम में महिलाओं से बात करते हुए उनकी खेती-बाड़ी के साथ-साथ बैंक से जुडऩे की बात कही। उन्होनें बताया कि प्रत्येक किसान को अपना बीमा करवाना चाहिए। जिससे विपदा के समय परिवार को बीमा का राशि का लाभ मिल सकें। उन्होंने बताया कि मात्र 12 रुपए प्रति वर्ष की राशि से किसान अपना बीमा करवा सकता हैं। उन्होनें बताया कि महिला स्वयं सहायता समूह को भी बैंक की ओर से कई प्रकार से वित्तीय सहायता प्रदान की जाती हैं। साथ में नान्दूलकर ने बताया कि जिस गांव में बैंक नही हैं वहां पर किसान भाई ई-मित्र से अपना लेन-देन कर सकते हैं। इस अवसर पर ग्रामीण स्वरोजगार विकास संस्थान, बैंक ऑफ बड़ौदा के निदेशक प्रेमकुमार कंसारा ने संस्थान पर होने वाले विभिन्न प्रशिक्षण के बारें में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सिलाई, कशिदाकारी, प्रसंस्करण, डेयरी आदि के प्रशिक्षण प्राप्त कर महिलाएं स्वरोजगार अपना सकती हैं। तथा अपनी आर्थिक स्थिति सुदृढ़ कर सकती हैं। कंसारा ने बताया कि उनके संस्थान पर 10 दिन से 30 दिन तक के प्रशिक्षण आयोजित किये जाते हैं।
संचालन ग्रामीण स्वरोजगार विकास संस्थान अनिता बोराणा ने किया। सोयाबीन से कई तरह के उत्पाद तैयार किये जा सकते हैं। जिसमें मुख्य रुप से दूध, पनीर, सोयाबीन बड़ी आदि के बारे में बताया। डॉ. व्यास ने महिलाओं को बताया कि वे गेंहू के आटे के साथ सोयाबीन का आटा, अजवाईन व मैथी मिलाकर उसकी पोषक क्षमता बढ़ा सकती हैं और कई प्रकार के रोगों से निजात पा सकती हैं। उन्होंने कहा कि महिलाएं स्वयं सहायता समूह बनाकर आत्मनिर्भर बन सकती हैं। छोटी-छोटी बचत करके महिलाएं अपना व्यवसाय शुरू कर सकती हैं। बच्चों की शिक्षा, खेती-बाड़ी के लिए, बीमारी में एवं व्यवसाय के लिए महिलाएं अपने समूह से ऋण ले सकती हैं।