प्रयागराज

प्रतियोगी छात्र मोर्चा का दावा, इतिहास में पहली बार आयोग की मुख्य परीक्षा का 3000 छात्रों ने किया बहिष्कार

सरकार से हस्तक्षेप की मांग, कहा आयोग द्वारा कराई गई पीसीएस 2017 की परीक्षा को रद्द हो

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पीएससी परीक्षा

इलाहाबाद. लोकसेवा आयोग द्वारा आयोजित मेंस 2017 परीक्षा को लेकर चल रहे विवादों के बीच एक बार फिर प्रतियोगी छात्र मोर्चा के तहत प्रतियोगी छात्रो ने आयोग की सुचिता पर सवालिया निशान लगाएं है। प्रतियोगी छात्र मोर्चा के लोग मिडिया से मुखातिब हो कर आयोग की कार्यप्रणाली पर सरकार को गंभीरता से विचार करने की बात कही। प्रतियोगी छात्र मोर्चा का दावा है, कि लोक सेवा आयोग के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है ।जब 3000 से ज्यादा परीक्षार्थियों ने पीसीएस के मुख्य परीक्षा को छोड़ दी है। कहा की इससे यह साबित होता है, कि लोक सेवा आयोग कितना असंवेदनशील है। कहा कि देश भर से आए अभ्यर्थियों का आयोग से भरोसा उठ गया है। जो आयोग की कार्यशैली पर बड़ा सवालिया निशान लगाता है।

प्रतियोगी छात्र मोर्चा ने आयोग की कार्यशैली पर आरोप लगाते हुए, कहा कि पीसीएस मुख्य परीक्षा 2017 के पेपर की तरह आयोग की अनियमितता के चलते समीक्षा अधिकारी सहायक समीक्षा अधिकारी 2016 का पेपर आउट हुआ, 2015 की प्रारंभिक परीक्षा का पेपर आउट हो गया । यह सब आयोग के असंवेदनशील रवैए का परिणाम है।प्रतियोगी छात्रों ने मांग की है, कि पीसीएस मुख्य परीक्षा 2017 को पूरी तरह से किया जाए। सरकार छात्रो का हित और आयोग के विश्वास की बहाली के लिए हस्तक्षेप करें।

प्रतियोगी छात्रों ने कहा की आयोग से मांग है कि एक वर्ष का परीक्षा कैलेंडर पुनः घोषित करें, तय समय पर परीक्षा करवाएं ।साथ ही परीक्षा का परिणाम अधिकतम 2 से 3 महीने में घोषित किया जाए । वहीं मुख्य परीक्षा का परिणाम अधिकतम पांच माह में घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की जाए ।मुख्य परीक्षा की तैयारियों के लिए छात्रों को परीक्षा की समय सारणी में घोषित करने और परीक्षा के बीच कम से कम तीन महीने का समय दिया जाए। पीसीएस 2016 सहित सभी लंबित परीक्षा परिणाम तत्काल घोषित करने की मांग की ।सभी परीक्षा केंद्रों पर नकल विहीन परीक्षा कराने लोक सेवा आयोग ठोस कदम उठाएं।

मीडिया से मुखातिब हुए प्रतियोगी छात्रों ने कहा की समीक्षा अधिकारी 2016 के प्री परीक्षा का प्रश्नपत्र शोशल साईट पर वायरल हो चुका है। 2016 की समीक्षा अधिकारी की परीक्षा का भी पेपर पहले आउट हो चुका है । जिसकी सीबीसीआईडी जांच चल रही है । कहा की सरकार से आग्रह है, कि इस पर तत्काल संज्ञान लें और दोषियों पर कठोर कार्यवाही की जाए। वहीं आयोग की अनियमितता पर चल रही सीबीआई जांच को दिशा को भटकाने और राजनितिक दबाव पर रोक लगानी चाहिए। साथ ही बताया कि सीबीआई के पास आयोग की धांधली के 70 प्रतिशत से ज्यादा शिकायतें साक्ष्य के साथ हैं, जिसे सीबीआई के अधिकारियों ने इलाहाबाद में रहते हुए स्वीकार किया था। ऐसे में सीबीआई जांच के दायरे में आ रहे अधिकारियों की गिरफ्तारी हो और उनके खिलाफ कार्यवाही की जाए।

By- Prasoon Pandey

Published on:
27 Jun 2018 09:36 am
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