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इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश- पीड़ित को ₹25000 का मुआवजा दे UP सरकार, किसान को लूंगी में घसीटकर थाने ले गई थी पुलिस

Allahabad High Court big decision: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने किसान को लूंगी में घसीट कर ले जाने के मामले में बड़ा आदेश दिया है। अपने आदेश में हाई कोर्ट ने कहा कि प्रदेश सरकार याचिकाकर्ता (Petitioner) को मुआवजा दे।‌

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इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश, फोटो सोर्स- ChatGPT

सांकेतिक फोटो- पत्रिका

Allahabad High Court News: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश पुलिस को बड़ा झटका दिया है। कोर्ट ने पुलिस के खिलाफ कड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा है कि घरेलू मामले में पुलिस को दखल देने का अधिकार नहीं है। पुलिस अधिकारी कोई पंच-सरपंच नहीं होता है, जो लोग उनके पास सुलह के लिए आए।

पुलिस लूंगी में एक व्यक्ति को ले गई थी थाने 

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस की मनमानी पर कड़ी टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार को 25 हजार रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। मामला 24 घंटे की गैरकानूनी हिरासत का है। जिसमें एक शख्स को लुंगी पहने हालत में घर से घसीटकर थाने ले जाया गया था। कोर्ट ने पुलिस अधिकारी के इस कार्य को व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकारों का उल्लंघन माना।

याचिकाकर्ता ने क्या कहा था? 

याचिकाकर्ता ने अपने शिकायती पत्र में बताया था कि वह अपने कृषि योग्य भूमि के देखभाल के लिए हंडिया थाना क्षेत्र स्थित अपने गांव गया था। 26 नवंबर 2022 को पुलिस अधिकारी उसे लूंगी और कुर्ता पहने हुए बाहर घसीट कर ले गए। पहले पुलिस चौकी ले जाया गया फिर हंडिया थाना ले गए। 24 घंटे हिरासत में रखा।

उनके एक रिश्तेदार ने घरेलू हिंसा की शिकायत दर्ज कराई थी। याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस ने छोड़ने के लिए 20 हजार की डिमांड की। इस संबंध में उनके पुत्र ने मुख्यमंत्री, पुलिस महानिदेशक और प्रयागराज पुलिस आयुक्त को भी पत्र भेजा था, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।

अदालत ने पुलिस पर बड़ी टिप्पणी की 

हाईकोर्ट की डबल बेंच जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस संजीव कुमार ने ये आदेश पारित किया। 29 मई को सुनवाई के बाद अपने आदेश में अदालत ने कहा कि पुलिस ने राज्य सरकार से मिले अधिकार की आड़ में गैरकानूनी रूप से व्यक्ति को आजादी से वंचित किया है। इसलिए याचिकाकर्ता मुआवजे का भी अधिकारी है।

अदालत में पुलिस ने याचिकाकर्ता की तरफ से लगाए गए आरोपों को स्पष्ट रूप से खारिज या खंडन नहीं किया। जिसे अदालत में पुलिस की तरफ से आरोपी को स्वीकार करना माना। हाई कोर्ट के इस आदेश का दूरगामी प्रभाव देखने को मिलेगा। पुलिस की मनमानी भी रुकेगी।

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