शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े विवाद में प्रयागराज प्रशासन अब माफी मांगने को तैयार दिख रहा है। माघ मेला छोड़कर वाराणसी जाने के बाद हालात बदले। संगम स्नान और प्रोटोकॉल को लेकर दो शर्तों पर बातचीत आगे बढ़ रही है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती से जुड़े हालिया विवाद पर अब प्रयागराज प्रशासन नरम पड़ता नजर आ रहा है। प्रशासन की ओर से माफी की तैयारी की बात सामने आई है। खुद शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी ने इसकी पुष्टि करते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और प्रयागराज प्रशासन के बीच चले आ रहे विवाद में नया मोड़ आया है। शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी योगीराज सरकार का कहना है कि अब प्रशासन माफी मांगने को तैयार है। उनके मुताबिक, शंकराचार्य का माघ मेला अचानक छोड़कर वाराणसी जाना प्रशासन के लिए अप्रत्याशित था। प्रशासन को उम्मीद थी कि शंकराचार्य माघ पूर्णिमा, यानी एक फरवरी के स्नान के बाद प्रयागराज से प्रस्थान करेंगे। अधिकारियों का मानना था कि इस बीच बातचीत कर उन्हें मना लिया जाएगा। लेकिन 28 जनवरी को शंकराचार्य के वाराणसी पहुंचने के बाद हालात बदल गए।
मीडिया प्रभारी ने बताया कि इसके बाद लखनऊ से आए दो वरिष्ठ अधिकारियों ने शंकराचार्य से संपर्क किया। अधिकारियों ने माघ पूर्णिमा के दिन माघ मेले में पूरे सम्मान के साथ संगम स्नान कराने का प्रस्ताव रखा। इस पर शंकराचार्य ने अपनी सहमति दो शर्तों के साथ दी।
पहली शर्त यह रखी गई कि जो भी जिम्मेदार अधिकारी हैं। वे अपनी गलती स्वीकार करते हुए लिखित रूप में माफी दें। दूसरी शर्त यह थी कि स्नान के दौरान चारों शंकराचार्यों के लिए तय प्रोटोकॉल को पूरी तरह लागू किया जाए।
योगीराज सरकार के अनुसार, शासन स्तर के कुछ अधिकारी वाराणसी आकर शंकराचार्य को प्रयागराज ले जाएंगे। और माघी पूर्णिमा पर उन्हें संगम में स्नान कराया जाएगा। इससे पहले 27 जनवरी की शाम को विवाद सुलझाने के लिए प्रशासन की ओर से एक गोपनीय बैठक भी हुई थी। इस हाई लेवल मीटिंग में तीन मुद्दों पर सहमति बन गई थी। लेकिन दो अहम बातों पर अड़चन आ गई। प्रशासन ने न तो लिखित माफीनामा देने पर सहमति जताई। और न ही सार्वजनिक रूप से माफी मांगने को तैयार हुआ। बैठक की पूरी जानकारी उसी रात शंकराचार्य तक पहुंचा दी गई। प्रशासन द्वारा अपनी गलती माने जाने के बावजूद लिखित और सार्वजनिक माफी से इनकार किए जाने पर शंकराचार्य ने माघ मेला छोड़ने का निर्णय लिया। इसके बाद 28 जनवरी की सुबह उन्होंने औपचारिक रूप से अपने फैसले का ऐलान कर दिया।