मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा है कि 152 चयनित में से एक तिहाई 47 लोगों के चयन में जांच में गड़बड़ी पाई गई। नियमानुसार परीक्षा व साक्षात्कार से चयन के बजाय केवल साक्षात्कार से चयन किया गया। ऐसे में उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने भर्ती में नियमों को अनदेखा किया है।
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने हैंडलूम एवं टेक्सटाइल विभाग में 2015 में हुई ग्रुप सी के 152 पदों पर हुए भर्ती में व्यापक गड़बड़ी की वजह से सरकार द्वारा चयन प्रक्रिया निरस्त करने को सही करार दिया है। इसके साथ ही सरकार के आदेश को रद कर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करने के एकलपीठ के फैसले को रद् कर दिया है।
मामले में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा है कि 152 चयनित में से एक तिहाई 47 लोगों के चयन में जांच में गड़बड़ी पाई गई। नियमानुसार परीक्षा व साक्षात्कार से चयन के बजाय केवल साक्षात्कार से चयन किया गया। ऐसे में उप्र अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने भर्ती में नियमों को अनदेखा किया है।
हाईकोर्ट ने कहा कि चयन होने मात्र से किसी को नियुक्ति का अधिकार नहीं मिल जाता। किसी चयनित की नियुक्ति नहीं की जा सकी थी। राज्य सरकार ने उचित कारण और सदाशयता से चयन में अनियमितता को देखते हुए चयन प्रक्रिया निरस्त की है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केसरवानी तथा न्यायमूर्ति जयंत बनर्जी की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपीलों को स्वीकार करते हुए दिया है। अपील पर अपर महाधिवक्ता अजीत कुमार सिंह व प्रणव कुमार गांगुली ने सरकार की तरफ से बहस की।
कोर्ट ने हाईकोर्ट प्रशासन से एक हफ्ते में याचिका पर जवाब मांगा है। याचिका की अगली सुनवाई 25 अप्रैल को होगी। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान ने राबिन सिंह व 38 अन्य की याचिका सहित एक दर्जन याचिकाओं की सुनवाई करते हुए दिया है।